
मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
कर्नल सोफिया मामले में किरकिरी व न्यायालयीन दबाव से उबरने के बाद एक बार फिर जनजातीय मंत्री विजय शाह अपने चिर परिचित अंदाज में लौट आए हैं. विगत कुछ समय से वे नर्वसनेस का शिकार थे. सोफिया मामले में उ्रन पर प्रकरण चलाने और मंत्री पद छोडऩे का भारी दबाव था. जब प्रदेश केबिनेट व पूरी सरकार उनके साथ खड़ी नजर आई तथा एसआईटी को उनके खिलाफ प्रकरण चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया, तब शाह ने राहत की सांस ली थी. एक बार फिर वे पूर्ण आत्मविश्वास के साथ मैदान में हैं. हाल ही में झाबुआ जिले के पिटोल में आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान शिविर में जनता के साथ हो रहे अन्याय पर वे उखड़ गए. लोकहित कार्यों की प्रगति और उन्हें मिली शिकायतों पर शाह ने वहां उपस्थित अफसरों से सवाल-जवाब कर डाले. निरुत्तर अफसरों को उन्होंने आड़े हाथ लिया. इसके अलावा फटकार के साथ ही जिले से बेदखल कर भोपाल ले जाने की चेतावनी दे डाली. दिव्यांगों के प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में सीएमएचओ की खिंचाई कर कह दिया की अब प्रमाणपत्रों के लिए ये लोग आपके चक्कर नहीं लगाएंगे. आपकी टीम ही पर शुक्रवार पोर्टेबल एक्सरे मशीन लेकर ब्लाक मुख्यालय जाएगी और शिविर में जांच के बाद हाथों-हाथ प्रमाणपत्र सौंपना होगा. उल्लेखनीय है कि विजय शाह झाबुआ जिले के प्रभारी मंत्री हैं. आगे शाह की चेतावनी व सबक पर अफसर कितना अमल कर पाते है, फिलहाल जनता उनकी वाहवाही में लगी है.
… और सम्हल गए शाह
कहा जाता है कि विजय शाह विवादों में घिर जाते हैं लेकिन मन से सरल हैं. सरलता की वजह से ही जुबां पर ऐसा कुछ आ जाता है जो सामाजिक तौर से व्यावहारिक नहीं है. पिटोल जन विश्वास शिविर में शाह के साथ फिर एक वाकिया जुड़ जाता, मगर वे तत्काल सम्हल गए और शब्द को तत्काल सुधार लिया. स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते समय वे जोश में होश खो बैठे. उन्होंने कहा कि शिकायतों पर एक्शन के पहले मैं खुद गुप्त पड़ताल करवाता हूं. यहां आते आते मैंने भी जायजा लिया. आपकी दुकाने देखी हैं बोलते बोलते वे सम्हल गए फिर आफिस (कार्यालय) कहा. उन्होंने स्पष्ट भी कर दिया कि दुकान मुंह से गलत निकल गया, इस पर अभी लोग बखेड़ा कर देंगे.
नपा अध्यक्ष की पीड़ा छलकी
नीमच नगर पालिका अध्यक्ष ने गत दिवस करीब 18 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की तैयारी और 47 प्रस्तावों पर चर्चा के लिए पीआईसी बैठक बुलाई थी. इस पर चर्चा के दौरान कुछ पीआईसी सभापतियों ने बैठक दूरी बना ली. सभापतियों की सीमित मौजूदगी ने अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा से तथाकथित अनबन की चर्चा को हवा दे दी. बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के साथ सभापति नीरज अहीर, छाया जायसवाल और धर्मेश पुरोहित ही मौजूद रहे. वहीं सभापति मनोहर मोटवानी भी कुछ देर बैठक में शामिल होने के बाद आवश्यक कार्य का बोल चले गए. ऐसे में सवाल उठने लगे कि शहर के विकास से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण बैठक से बाकी सभापतियों की दूरी की वजह क्या रही? हालांकि सभापतियों की गैरमौजूदगी को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने बात सम्हाल कर कहा कि बैठक में चार सभापति थे. मनोहर मोटवानी आए थे पर आवश्यक काम के चलते चर्चा के बाद चले गए. उन्हें मिलाकर पांच सदस्यों से कोरम पूरा हो गया था. कुछ सभापति निजी कारणों और व्यस्तताओं के चलते नहीं आ पाए होंगे. अध्यक्ष ने बात को रफा-दफा करने की कोशिश जरूर की, लेकिन बयान में उनकी पीड़ा भी छलक गई. उन्होंने कहा कि शहर के विकास कार्यों में सहयोग देना सभी की जिम्मेदारी है. विकास के लिए हर व्यक्ति की अपनी नैतिक जिम्मेदारी होती है. उनका इशारा बैठक से गैरमौजूद रहे पीआईसी सभापतियों की ओर था.
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