अब ऑटो-मोड पर दिखेगी बसों की फिटनेस, मंत्री उदय प्रताप ने कहा- कंडम नीति पर भी हो रहा पुनर्विचार

ग्वालियर: प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने ग्वालियर में संभागीय समीक्षा बैठक की। बैठक में दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ सभी जिलों के अधिकारी भी मौजूद थे, मंत्री ने ग्वालियर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा सहित परिवहन विभाग की अन्य योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। वहीं उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों से जर्जर स्कूल भवनों की जानकारी ली और सांदीपनी विद्यालयों के तैयार भवनों की जानकारी ली।

प्रेस से बात करते हुए मंत्री राव उदय प्रताप ने कहा कि पिछले ढाई-तीन साल में परिवहन के क्षेत्र में सरकार ने सख्त कार्रवाई की लगातार मॉनिटरिंग हो रही हैं, परिवहन से जुड़ी केंद्र सरकार की गाइडलाइन को सख्ती के साथ लागू कर रहे हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में पारदर्शी और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था को लेकर काम हो रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक बड़ा परिवर्तन हो रहा है, अब बसों के पेपर, फिटनेस, परमिट, लाइफ खत्म होने का डेटा अब ऑटो-मोड पर होगा और ये हमारे कमांड सेंटर में दिखेगा, जल्दी ही ये सिस्टम काम करने लगेगा।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार 15 साल पुरानी बसों को कंडम करने के नियम पर विचार कर रही है, कंडम नीति पर सरकार पुनर्विचार कर रही है। इस पर 4 दिन पहले ही ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के साथ बैठक हुई है।शिक्षा मंत्री ने कहा कि सांदीपनी विद्यालयों को लेकर सरकार बहुत गंभीर है, उन्होंने कहा समीक्षा में सामने आया कि कई स्कूल भवन 3-4 साल पहले बन चुके हैं लेकिन छोटी छोटी कमियों के कारण हैंडओवर नहीं हो पाए हैं, उनका रिव्यू किया गया है, जल्दी ही उन कमियों को दूर कर स्कूल भवन हैंडओवर किये जायेंगे।

मिनी सांदीपनी विद्यालयों की योजना के सवाल पर मंत्री ने कहा कि मिनी जैसी कोई योजना नहीं है स्कूल भवनों की डिजाइन में हमने रीस्ट्रक्चरिंग की है। पहले कमरा 24×28 का बनता था लेकिन सीबीएसई नॉर्म्स के अनुसार 20×26 में भी काम चल सकता है, पहले ग्राउंड प्लस 2 बनता था, अब ग्राउंड प्लस 4 बना रहे हैं,इससे लागत कम होगी, सरकार ने तकनीकी बातों पर विशेषज्ञों से चर्चा कर मॉडल तैयार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हम अगले 3 सालों के लिए एक साथ प्लान तैयार कर रहे हैं, जर्जर भवन, भवन विहीन स्कूल, मेंटेनेंस, शौचालय और इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए लगभग 2800 करोड़ रुपए भी एक साथ जारी कर रहे हैं, अगले 2 एकेडमिक ईयर में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे और ये मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार होगा कि स्कूलों के सुधार की दिशा में सभी बुनियादी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराई जायेंगी।

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