सतना: जिले में कृषि उपज मंडी के नियमों को ताक पर रखकर लहसुन की खरीदी और बिक्री का अवैध और मनमाना कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। मंडी में व्यापारियों द्वारा पंजीयन तो कराया गया है, लेकिन हकीकत में कारोबार का एक बड़ा हिस्सा बिना मंडी टैक्स चुकाए अवैध तरीके से संचालित हो रहा है। बाहर से आने वाली सस्ती लहसुन बिचौलियों और मुनाफाखोरों के हाथ लगकर सतना पहुंचते-पहुंचते करीब चार गुना महंगी हो जाती है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को महंगाई के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
जिले में बाहर से लहसुन क्वालिटी के हिसाब से औसतन 60 से 80 रुपए प्रति किलो के थोक भाव में मंगाई जाती है। इस पर परिवहन का खर्च मात्र 1 से 2 रुपए प्रति किलो ही आता है। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर थोक बाजार में पहुंचते ही यही लहसुन क्वालिटी के आधार पर 140 से 160 रुपए प्रति किलो तक बेची जाने लगती है। सफर तय करते हुए जब यह लहसुन आम उपभोक्ता तक यानी फुटकर और ठेले बाजारों में पहुंचती है, तो इसकी कीमत उछलकर 200 से 250 रुपए प्रति किलो तक जा पहुँचती है। इस प्रकार, बाहर से लेकर फुटकर बाजार तक आने में लहसुन की कीमत में लगभग 4 गुना की बढ़ोतरी हो जाती है।
मंडी टैक्स की चोरी और प्रशासनिक अनदेखी
इस पूरे कारोबार में सबसे बड़ा खेल मंडी शुल्क की चोरी का है। नियमों को अनदेखा करके अवैध तरीके से हो रही इस खरीद-फरोख्त के कारण शासन को हर महीने लाखों रुपए के राजस्व का चूना लग रहा है। व्यापारी मंडी के भीतर पंजीयन का लाभ तो ले रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड से बाहर बड़े पैमाने पर अवैध सौदों को अंजाम दिया जा रहा है।
आम जनता पर महंगाई की मार
जिले की जनता लंबे समय से इस अघोषित महंगाई की मार झेल रही है। रसोई का अहम हिस्सा बन चुकी लहसुन के दाम आसमान छूने के कारण आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ रहा है। महंगाई के इस कृत्रिम संकट के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने से आमजन को कभी भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
कृषि उपज मंडी के सहायक केपी सिंह ने बताया कि मंडी शुल्क डेढ़ प्रतिशत निर्धारित है। लहसुन का कारोबार अभी मंडी व्यवस्था के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। मुख्य कृषि उपज मंडी में लहसुन की आवक नहीं होती, बल्कि इसका अधिकांश कारोबार ढिलौरा मंडी में किया जा रहा है। मुख्य मंडी में केवल सीमित मात्रा में आलू और प्याज की आवक होती है, जिसके कारण मंडी को अपेक्षित शुल्क नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में ऊपर से निर्देश मिले हैं और मंडी प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। बाहर से आने वाला माल नियमानुसार आता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कारोबार करने वाले व्यापारियों के पास वैध लाइसेंस नहीं है।
