नयी दिल्ली, एक नवंबर (वार्ता) उद्योग मंडल सीआईआई ने माल एवं सेवाकर ( जीएसटी ) प्रणाली में ऐतिहासिक सुधारों की सराहना की है और इन पर अपने एक आकलन में कहा है कि जीएसटी परिषद का आम सहमति पर आधारित दृष्टिकोण भारत में भविष्य के आर्थिक सुधारों के लिए एक मॉडल पेश करता है।
इन आकलनों के आधार सीआईआई ने रविवार को एक बयान में जीएसटी परिषद द्वारा प्रवर्तन शक्तियों को तर्कसंगत बनाने और अपराध की श्रेणी से बाहर करने के ऐतिहासिक फैसलों को, भारत के ‘विश्वास-आधारित आर्थिक प्रशासन’ की ओर बढ़ने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत सुधारों में से एक बताया है।
पिछले माह आठ तारीख की जीएसटी परिषद के में लिए गए फैसलों का आकलन करते हुए, सीआईआई ने कहा है कि ” इनका महत्व केवल कराधान तक सीमित नहीं है। ये फैसले दिखाते हैं कि कैसे केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसे कठिन सुधार कर सकती हैं, जो सरकार और व्यवसायों के बीच संबंधों को बेहतर बनाते हैं।”
उद्योगमंडल ने कहा है, ”ये फैसले एक संतुलित अनुपालन (कानून लागू करने वाली) व्यवस्था, अधिक स्पष्टता और वैध व्यावसायिक गतिविधियों में विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव हैं, जबकि साथ ही जानबूझकर की गई धोखाधड़ी और कर चोरी को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय भी बरकरार रखे गए हैं।”
सीआईआई का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि सरकार द्वारा रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 2,31,290 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल अक्टूबर के 1,88,125 करोड़ रुपये के मुकाबले 22.9 फीसदी अधिक है। जीएसटी परिषद द्वारा कर की दरों में पिछले वर्ष सितंबर में समन्वय कर उपभोक्ता और उद्योगों पर कर का बोझ हलका किये जाने के बाद कर संग्रह में उछाल बना हुआ है। यह देश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी का भी एक संकेत माना जा रहा है।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “जीएसटी परिषद के इन फैसलों को एक ऐतिहासिक संस्थागत सुधार के रूप में विशेष मान्यता मिलनी चाहिए। हम इस बदलाव को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व की सराहना करते हैं। साथ ही, हम प्रवर्तन, राजस्व सुरक्षा और करदाताओं के अधिकारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आम सहमति बनाने में राज्य सरकारों की सकारात्मक भूमिका की भी प्रशंसा करते हैं। इतने बुनियादी बदलावों पर सहमति तक पहुँचना ‘सहकारी संघवाद’ की एक बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि केंद्र और राज्य सरकारें, वैध व्यवसायों में विश्वास बढ़ाने के लिए, मौजूदा नियामक प्रथाओं पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हैं।”
जीएसटी परिषद ने आठ अक्टूबर 2026 की बैठक में कई महत्वपूर्ण कदम शामिल उठाए हैं जिनमें जीएसटी अधिनियम की धारा 69 को हटाकर गिरफ्तारी की शक्तियों को खत्म करना; मुकदमा चलाने के लिए मौद्रिक सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करना; धारा 132 के तहत आने वाले अपराधों के दायरे को सीमित करना; और कारावास के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाना, जिसमें सजा तय करने में न्यायिक विवेक को अधिक महत्व देना शामिल है। इन फैसलों को लागू करने के लिए आवश्यक विधायी संशोधनों की आवश्यकता होगी।
सीआईआई ने कहा है , ‘ ये कदम जीएसटी प्रवर्तन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाते हैं, जबकि जानबूझकर की गई धोखाधड़ी और कर चोरी जैसे गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान अभी भी बना रहेगा। ये फैसले मानते हैं कि वास्तविक व्यावसायिक विवादों, प्रक्रियात्मक गलतियों और जानबूझकर की गई गड़बड़ियों के साथ अलग-अलग तरह से निपटा जाना चाहिए। व्यवसायों के लिए, विशेष रूप से सूक्ष्म , लघु और मझोले उद्यमों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे अनिश्चितता, प्रतिष्ठा को होने वाला नुकसान, कानूनी खर्च और प्रबंधन में आने वाली बाधाएं कम होंगी, जो अक्सर अत्यधिक कठोर आपराधिक परिणामों के कारण पैदा होती थीं।
