लंदन, 01 नवंबर (वार्ता) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अटलांटिक पार दास व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका के लिए औपचारिक माफी की संभावना पर विचार करने की इच्छा जताई है, लेकिन आर्थिक मुआवजा देने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह “प्रभावित लोगों के साथ संवाद” करना चाहते हैं और “माफी की मांगों” पर विचार करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके अनुसार आर्थिक मुआवजा इसका “सही जवाब नहीं” है।
अफ्रीकी क्षतिपूर्ति के लिए सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) ने श्री बर्नहैम के बयान का स्वागत किया है। समूह की अध्यक्ष बेल रिबेरो-एड्डी ने बीबीसी रेडियो 4 के कार्यक्रम ‘टुडे’ में कहा कि यह मुद्दा केवल पैसे तक सीमित नहीं है।
यह बयान अगले सप्ताह कैरेबियाई क्षेत्र में होने वाले राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले आया है। किंग चार्ल्स तृतीय के क्षेत्रीय दौरे के दौरान ब्रिटेन से माफी मांगने की मांग फिर तेज हुई है। दौरे के पहले पड़ाव बहामास में राजा ने अतीत के “कष्टों” का उल्लेख किया था। बाद में गुयाना में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ गुलाम बनाए गए लोगों के विद्रोह के स्थल का दौरा किया।
श्री बर्नहैम ने शनिवार को अटलांटिक पार दास व्यापार को “क्रूर और बर्बर उल्लंघन” बताया। इस व्यापार के दौरान अफ्रीकी लोगों को जबरन अमेरिका ले जाया जाता था। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को “अपने अतीत का सामना करना चाहिए”। ब्रिटिश सरकार ने दास प्रथा के लिए कभी औपचारिक माफी नहीं मांगी है और न ही मुआवजा देने की पेशकश की है। श्री बर्नहैम ने अपने पूर्ववर्तियों की नीति को बरकरार रखा है और मुआवजा भुगतान पर विचार करने से भी परहेज किया है।
श्री बर्नहैम ने ‘द गार्जियन’ में लिखे एक लेख में कहा, “मुझे नहीं लगता कि आज के ब्रिटिश नागरिकों को उन ऐतिहासिक गलतियों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, चाहे वे कितनी भी जघन्य क्यों न रही हों। वे अलग दौर में, अलग कानूनों के तहत हुई थीं और आज के नागरिकों की उनमें कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल देश वर्षों से इस मुद्दे पर “ईमानदार बातचीत” की मांग करते रहे हैं। उन्होंने ” सुव्यवस्थित संवाद” की पेशकश करते हुए कहा, “ब्रिटिश राज्य की ओर से औपचारिक माफी की मांगों को सुनना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मैं इसके लिए तैयार हूं।” राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक एक नवंबर को एंटीगुआ में शुरू होगी। अपने दौरे के तहत किंग चार्ल्स तृतीय इसका उद्घाटन करेंगे।
ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बेडेनॉक ने कहा कि “आज के ब्रिटिश करदाताओं को उन घटनाओं के लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराने का कोई कारण नहीं है, जो हममें से किसी के जन्म से कई पीढ़ियों पहले हुई थीं।” श्री बेडेनॉक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि लेबर पार्टी “पहले ही ब्रिटेन की कल्याणकारी व्यवस्था पर बहुत अधिक खर्च कर रही है और अब एंडी श्री बर्नहैम के लिए वैश्विक कल्याण पर खर्च करने का यह सही समय नहीं है।”
लिबरल डेमोक्रेट नेता एड डेवी ने कहा, “मेरा मानना है कि इस मामले में हमारा दायित्व है और माफी मांगना हमेशा एक अच्छी बात होती है।” बेल रिबेरो-एड्डी ने कहा कि उनका संसदीय समूह दास व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका स्वीकार किए जाने का स्वागत करता है, लेकिन सरकार अब भी औपचारिक राजकीय माफी से पीछे है, जबकि “इसमें कोई खर्च नहीं आता”।
उन्होंने कार्यक्रम ‘टुडे’ में कहा, “किसी बात को स्वीकार करना उसे समझने के समान नहीं है।” उन्होंने कहा, “जब तक हम माफी नहीं मांगते, तब तक हम कभी समान स्तर पर नहीं होंगे… इसे राष्ट्रों का परिवार यानी राष्ट्रमंडल कहा जाता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।”
क्लैफम और ब्रिक्सटन हिल की सांसद सुश्री रिबेरो-एड्डी ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, ब्रिटेन को आर्थिक मुआवजे के लिए अब तक कोई बिल नहीं दिया गया है। इसलिए इस संदर्भ में “क्षतिपूरक न्याय” पर चर्चा करना मूल मुद्दे से भटकना है। उन्होंने कहा, “मेरी चिंता आर्थिक मुआवजे पर ध्यान केंद्रित किए जाने को लेकर है। मुझे लगता है कि यह बेहद समस्याग्रस्त है और लोगों की कही गई बातों को ठीक से नहीं सुना गया है।” डाउनिंग स्ट्रीट का मानना है कि ऐसे समय में राष्ट्रमंडल को मजबूत करना ब्रिटेन के हित में है, जब चीन और रूस इस समूह में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

