बालाघाट:जिले में एक ओर सरकारी धान घोटाले की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर शासकीय उचित मूल्य दुकानों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के चावल और गेहूं के गबन के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। रामपायली और भरवेली थाना क्षेत्रों में पीडीएस चावल घोटाले की जांच अभी जारी ही है कि अब गढ़ी क्षेत्र में 342 क्विंटल राशन के गबन का मामला चर्चा में आ गया हैं। इस मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। कलेक्टर के प्रतिवेदन के बाद एसडीएम के आदेश पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ने 2 अगस्त को गढ़ी थाना प्रभारी को प्रतिवेदन सौंपकर राशन गबन के मामले में विके्रता, सहायक प्रबंधक, प्रबंधक सहित संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इसके बावजूद तीन माह बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होना बड़ा सवाल है? वहीं, रामपायली और भरवेली में इसी तरह के मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अन्य थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की गई, तो गढ़ी के मामले में अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई? आखिर इस मामले में कार्रवाई में देरी की वजह क्या है?
जानकारी के अनुसार, सेवा सहकारी समिति गढ़ी द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान गढ़ी, डूडवा और समरिया की कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी आकाश श्रीवास्तव ने समय-समय पर जांच की। जांच के दौरान तीनों दुकानों में 342 क्विंटल राशन की कमी पाई गई, जिसमें 210 क्विंटल चांवल, 132 क्विंटल गेहूं और 34 किलोग्राम शक्कर शामिल है। खाद्यान्न की कमी और अनियमितताओं के संबंध में अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम), बैहर ने 8 जून को समिति प्रबंधक थानसिंह कोर्राम, सहायक प्रबंधक ओ.पी. बिसेन, प्रशासक दीनदयाल ठाकरे और विक्रेता रोहित सिंह धुर्वे को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
11 जून को एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत जवाब में खाद्यान्न की मात्रा में अंतर होना स्वीकार किया गया। मामले में पदीय कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई, जिससे कई पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न से वंचित रहना पड़ा। इसके बाद मामला जिला आपूर्ति अधिकारी, बालाघाट के माध्यम से कलेक्टर न्यायालय पहुंचा। तत्कालीन कलेक्टर मृणाल मीना ने 21 जुलाई को एसडीएम बैहर को संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इन निर्देशों के तहत तत्कालीन एसडीएम अर्पित गुप्ता ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी आकाश श्रीवास्तव को संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्यालय को अवगत कराने के आदेश दिए। इसी के पालन में आकाश श्रीवास्तव ने 2 अगस्त 2026 को गढ़ी थाना प्रभारी को प्रतिवेदन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया।
तीनों दुकानों में की कालाबाजारी…
जांच के दौरान शासकीय उचित मूल्य दुकान समरिया में 65 क्विंटल चावल और 55 क्विंटल गेहूं, डूडवा दुकान में 95 क्विंटल चावल, 37 क्विंटल गेहूं और 34 किलोग्राम शक्कर तथा गढ़ी दुकान में 50 क्विंटल चावल और 40 क्विंटल गेहूं की कमी पाई गई। इस तरह तीनों दुकानों में कुल 342 क्विंटल खाद्यान्न और 34 किलोग्राम शक्कर कम मिली। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब और पात्र हितग्राहियों को वितरित किए जाने वाले राशन की इतनी बड़ी मात्रा में कमी सामने आने से खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में विके्रता रोहित धुर्वे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
तीन माह हो गए गढ़ी पुलिस की कार्यवाई क्यों नहीं?
शासकीय उचित मूल्य दुकान में तीनों दुकानों से 342 क्विंटल राशन की कालाबाजारी को लेकर जिला प्रशासन ने शक्त रूक अपनाया हैं लेकिन गढ़ी पुलिस की कार्यवाई को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहें है। रामपायली व भरवेली थाना पुलिस ने तत्काल ही विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही हैं। वहीं, गढ़ी पुलिस के द्वारा तीन माह महिना बितने को आए हैं कि लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं किया गया हैं। आखिर क्या पुलिस कालाबाजारी में साथ देने का काम करी है या फिर उन्हें राजनीति दबाव के चलते बचाने के काम किया जा रहा हैं।
इनका कहना हैं
विक्रेता हेमसिंह धुर्वे को गढ़ी और डुडवा शासकीय उचित मूल्य संचालित कर रहे थे तभी उनकी मौत हो गई और जांच में राशन कम पाया गया। वहीं समरिया में अन्य विक्रेता द्वारा राशन कमी की पूर्ति कर दी गई हैं। इसी मामले में खाद्य अधिकारी द्वारा थाना में शिकायत दी गई हैं।
ओ. पी. बिसेन
सहायक प्रबंधक, सेवा सहकारी समिति गढ़ी
कलेक्टर के आदेश प्रतिवेदन के तहत एसडीएम बैहर के द्वारा हमें निर्देश दिया गया था कि गढ़ी के शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में किए अनियमितताओं को लेकर गढ़ी थाना में एफआईआर दर्ज किया जावे जिस पर हमने 2 अगस्त को थाना प्रभारी को एफआईआर के लिए प्रतिवेदन दिया गया था लेकिन अब तीन माह हो गए संबंधितों पर एफआईआर दर्ज नहीं कि गई हैं।
आकाश श्रीवास्तव
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी, बैहर
