मर्ज अनेक, हर मरीज को मिलता भोजन एक

सीहोर। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की बीमारियां भले ही अलग-अलग हों, लेकिन भोजन की थाली सबकी एक जैसी है. किसी मरीज को हल्का भोजन चाहिए तो किसी को नमक, तेल और मसालों से परहेज. वहीं गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को भी स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार पौष्टिक आहार की जरूरत होती है. इसके बावजूद बीमारी और चिकित्सकीय जरूरत के हिसाब से अलग-अलग भोजन की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है. कई मरीजों के परिजनों को अपने घर से परहेजी भोजन मंगवाना पड़ता है.

सरकारी योजनाएं किस तरह धरातल पर लडख़ड़ाती हैं. इसका उदाहरण जिला अस्पताल में देखा जा सकता है. यहां उपचारार्थ भर्ती मरीजों को दिए जाने वाला भोजन एक जैसा होता है. भले ही डॉक्टर ने मरीज को परहेजी भोजन करने की सलाह दे रखी हो. शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों को मुफ्त भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराने का प्रावधान है. जिला अस्पताल की कैंटीन में ठेकेदार द्वारा भोजन तैयार किया जाता है. निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन देने का दावा किया जाता है, लेकिन मरीज की बीमारी और खानपान संबंधी जरूरतों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. अस्पताल में कोई मरीज पेट संबंधी बीमारी से जूझ रहा है, तो किसी को ऑपरेशन के बाद हल्के भोजन की जरूरत होती है. इसी तरह गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार महत्वपूर्ण है. प्रसव के बाद महिलाओं को शरीर की रिकवरी और स्तनपान के लिए पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है. ऐसे में सभी को एक जैसा भोजन देना उनकी अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता. बीमारी या परहेज के कारण सामान्य भोजन नहीं खा पाने वाले मरीजों को घर से खाना मंगवाना पड़ता है. जिनके परिजन साथ नहीं हैं, उनके लिए परेशानी बढ़ जाती है. ऐसे में मुफ्त भोजन मिलने के बावजूद कई मरीज लाभ नहीं ले पाते.

मरीजों की जरुरत के अनुसार बने व्यवस्था

प्रसूता वार्ड में भर्ती महिला की परिजन ग्राम उलझावन निवासी उषा बाई ने बताया कि अस्पताल में दिया जाने वाला भोजन तो ठीक रहता है. जच्चा वाले लड्डू भी दिए जाते हैं, लेकिन प्रसव के पश्चात जिस तरह गर्म तासीर वाले भोजन की महिला को जरुरत होती है. उसके हिसाब से भोजन नहीं मिल पाता. ऐसे में घर से ही भोजन मंगवाना पड़ता है. इसी तरह मेडिकल वार्ड में भर्ती ग्राम काहिरी के उत्तमसिंह ने बताया कि उन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर की शिकायत है. ऐसे में उन्हें कम नमक का भोजन मिलना चाहिए, लेकिन सब मरीजों को एक जैसा भोजन दिए जाने की वजह से वह अस्पताल से मिलने वाला भोजन नहीं लेते हैं.

निर्धारित मेन्यू के आधार पर ही देते हैं भोजन

जिला अस्पताल में मरीजों को भोजन मेन्यू के अनुसार ही दिया जाता है. कम तला, भुना और कम मसाले वाले भोजन में सब्जियां व दूध दलिया सहित फल भी दिए जाते हैं.

डॉ. यूके श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

हमारे द्वारा पूर्ण गुणवत्ता व स्वच्छता के साथ ही भोजन बनाया जाता है. भोजन की प्रतिदिन जांच होती है.अधिकारी नियमित जायजा लेने आते हैं. हम निर्धारित मेन्यू के आधार पर ही भोजन बनाते हैं. सीजन के हिसाब से सब्जियों को बनाने में जरुर बदलाव होता है. प्रसूता महिलाओं का डाइट चार्ट अलग है. उसी के हिसाब से भोजन दिया जाता है.

नैतिक राय, संचालक मेसर्स मेरे राम

Next Post

पुरी को राज्यसभा भेजने के फैसले पर पटवारी ने उठाए सवाल

Thu Oct 29 , 2026
विशेष संवाददाता भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एपस्टीन फाइल्स में पुरी के नाम का उल्लेख होने को लेकर उठ रहे […]

You May Like