जेरूसलम, इजराइल में मंगलवार को संपन्न हुए बहुप्रतीक्षित आम चुनाव के एग्जिट पोल सामने आ गए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के गुट के बीच कांटे का मुकाबला दिखाया जा रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के भयानक हमले के बाद पहली बार हुए इस चुनाव में जनता ने ऐतिहासिक रूप से 77.7 प्रतिशत का भारी मतदान किया, जो 1999 के बाद से सबसे सर्वाधिक है। हालांकि, विभिन्न इजराइली टीवी चैनलों के एग्जिट पोल से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि 120 सीटों वाली नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का जादुई आंकड़ा फिलहाल किसी भी गठबंधन को मिलता नहीं दिख रहा है।
सरकारी चैनल कान 11 के पोल में दोनों गुटों को 51-51 सीटें, अरब पार्टियां बन सकती हैं अगली सरकार में किंगमेकर
इजराइल के सरकारी चैनल ‘कान 11’ के एग्जिट पोल के अनुसार, नेतन्याहू समर्थक ब्लॉक और विरोधी ब्लॉक दोनों को 51-51 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि ‘चैनल 14’ और फिल्बर के सर्वेक्षणों में नेतन्याहू गुट को 60 सीटों तक पहुंचते दिखाया गया है। इस त्रिशंकु संसद की स्थिति में 17 से 18 सीटें जीतने का अनुमान लगा रही अरब पार्टियां (रा’म और जॉइंट लिस्ट) निर्णायक भूमिका यानी ‘किंगमेकर’ के रूप में उभरी हैं। रा’म पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने पुष्टि की है कि सत्ता के संतुलन को साधने के लिए नेतन्याहू और विपक्ष दोनों गुटों के प्रतिनिधि उनसे लगातार संपर्क साध रहे हैं।
19 साल तक सत्ता पर काबिज रहे नेतन्याहू के सामने पूर्व आईडीएफ प्रमुख गादी आइजनकोट ने पेश की सबसे मजबूत चुनौती
इजराइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू को इस बार सुरक्षा चूक, राष्ट्रीय जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं के मुद्दों पर पूर्व आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइजनकोट और उनकी ‘याशर’ पार्टी से सबसे कड़ी टक्कर मिली है। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि यदि छोटे दक्षिणपंथी दल 3.25 प्रतिशत के अनिवार्य वोट शेयर थ्रेशोल्ड को पार करने में विफल रहते हैं, तो नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना और मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें सेंट्रल इलेक्शन कमेटी द्वारा आधिकारिक मतगणना के अंतिम नतीजों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।

