नई दिल्ली, देश के व्यापारियों और करदाताओं के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने एक बेहद राहत भरा बड़ा कदम उठाया है। अब जीएसटी अधिकारी केवल शक, तकनीकी चूक या रिटर्न में हुई मामूली गलती के आधार पर किसी भी कारोबारी पर टैक्स चोरी या फर्जीवाड़े का गंभीर केस दर्ज नहीं कर पाएंगे। नए नियमों के मुताबिक, अधिकारियों को किसी भी व्यापारी पर धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का आरोप लगाने से पहले यह साबित करना होगा कि उस व्यापारी की नीयत सचमुच टैक्स चुराने की ही थी।
सिर्फ मानवीय भूल को नहीं माना जाएगा टैक्स चोरी, हालिया जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद प्रशासनिक बदलावों को तुरंत किया गया लागू
जीएसटी बोर्ड ने साफ कर दिया है कि सीजीएसटी अधिनियम की सख्त धाराओं का इस्तेमाल तभी किया जा सकेगा जब अधिकारियों के पास पुख्ता सबूत हों कि गलती जानबूझकर की गई थी। यह निर्देश हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए फैसलों के तहत जारी किए गए हैं। काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों के मनमाने रवैये पर लगाम लगाने के लिए मुकदमेबाजी की सीमा को भी 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे एमएसएमई सेक्टर को बड़ी सुरक्षा मिलेगी।
अदालतों के पुराने फैसलों का हवाला देकर जारी हुआ निर्देश, कारण बताओ नोटिस में ठोस सबूतों का जिक्र करना अब हुआ पूरी तरह अनिवार्य
विभिन्न अदालतों के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यदि अब कोई कर अधिकारी किसी व्यापारी को कारण बताओ नोटिस (SCN) जारी करता है, तो उसे नोटिस में यह साफ तौर पर बताना होगा कि वह किस आधार और सबूत के तहत धोखाधड़ी का आरोप लगा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जबकि गिरफ्तारी और अन्य कानूनी संशोधनों से जुड़े प्रावधान अगले साल 1 अप्रैल से देश भर में प्रभावी हो जाएंगे।

