इंदौर: राजवाड़ा और आसपास के बाजारों में त्योहारों के दौरान लगने वाला जाम अब गंभीर समस्या बन चुका है. यातायात सुधारने के लिए कई प्रयोग किए गए, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आता. इसकी प्रमुख वजहों में ई-रिक्शा का बेतरतीब संचालन भी शामिल है.चालक कहीं भी वाहन रोककर सवारी बैठाने या उतारने लगते हैं, जिससे पीछे आने वाले वाहन थम जाते हैं. देखते ही देखते वाहनों की कतार लगती है और यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है. समस्या केवल राजवाड़ा के मुख्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है. किशनपुरा पुल की ओर जाने वाले मार्ग पर भी बार-बार जाम लगता है. त्योहारों में बाजारों पर बढ़ते दबाव के बीच ई-रिक्शा का अनियंत्रित ठहराव परेशानी को और बढ़ा देता है.
संचालन व्यवस्थित करना जरूरी
राजवाड़ा जैसे व्यस्त बाजार क्षेत्र में केवल यातायातकर्मियों की तैनाती या अस्थायी इंतजामों से स्थायी राहत मिलना मुश्किल है. जब तक ई-रिक्शा के रुकने और सवारी बैठाने-उतारने के स्थान तय नहीं होंगे, तब तक जाम की समस्या बनी रह सकती है. इसके लिए प्रमुख मार्गों पर निर्धारित पिकअप-ड्रॉप पॉइंट बनाए जाएं, व्यस्त मोड़ों और संकरी सड़कों पर अनावश्यक ठहराव रोका जाए तथा नियम तोड़ने वालों पर नियमित कार्रवाई हो. जरूरत के अनुसार ई-रिक्शा के मार्ग और स्टैंड भी निर्धारित किए जाएं, ताकि सड़क को ही अस्थायी स्टैंड बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे.
सुविधा भी मिले, यातायात भी न रुके
संतोष ठाकुर ई रिक्शा सवारी ने बताया कि ई-रिक्शा आम लोगों के लिए उपयोगी परिवहन साधन हैं. इसलिए इन्हें पूरी तरह हटाने के बजाय इनके संचालन को अनुशासित करना जरूरी है. चालकों के लिए स्पष्ट नियम, यात्रियों के चढ़ने-उतरने की सुविधाजनक जगह और लगातार निगरानी से ही व्यवस्था सुधर सकती है. दुर्गेश राजवाड़ा के व्यापारी ने बताया कि राजवाड़ा और किशनपुरा पुल क्षेत्र को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ई-रिक्शा संचालन की स्थायी व्यवस्था कब बनेगी? त्योहारों पर यातायात संभालने के लिए हर बार नए प्रयोग करने के बजाय समस्या की जड़ पर कार्रवाई जरूरी है. ई-रिक्शा के लिए तय स्टैंड, निर्धारित ठहराव स्थल और नियमों का सख्त पालन ही जाम घटाने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है
