नई दिल्ली, (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को विपक्ष के 12 अक्टूबर के मार्च की कवरेज के दौरान धक्का दिए जाने का आरोप लगाने वाली एक पत्रकार की याचिका पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया के यह बताए जाने के बाद औपचारिक नोटिस जारी किया कि 26 अक्टूबर को सुनवाई के संकेत के बावजूद मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ था।
श्री भाटिया ने 16 अक्टूबर को शीर्ष अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए स्पष्टता मांगी थी कि आवेदन पर नोटिस जारी किया गया है या नहीं। उस समय मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि सभी संबंधित मामलों में नोटिस जारी किया जा चुका है और संकेत दिया था कि याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
उस दिन मामला सुनवाई के लिए नहीं आया। इसके बाद श्री भाटिया ने मंगलवार को फिर पीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया, जिसके बाद श्री गांधी को औपचारिक नोटिस जारी किया गया।
यह आवेदन श्री गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के 12 अक्टूबर के मार्च से संबंधित है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने के सिलसिले में उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकाला था।
पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उस समय वह गर्भवती थीं और मार्च की कवरेज के दौरान जब वह रिपोर्टिंग करने की कोशिश कर रही थीं, तब श्री गांधी ने उन्हें पकड़कर खींचा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद श्री गांधी के सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह गिर गईं। बाद में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कांग्रेस ने इन आरोपों से इनकार किया है।
12 अक्टूबर को निकाला गया यह मार्च एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शनों के बीच हुआ था।
