स्टार्टअप इकाइयों ने देश भर में सृजित किये हैं 25.42 लाख रोजगार के अवसर

नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (वार्ता) स्टार्टअप इंडिया के अंतर्गत 770 से अधिक जिलों में काम कर रही 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप इकाइयों ने 25.42 लाख से अधिक रोजगार सृजित किये हैं।

यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में दी।

विभाग ने कहा है कि स्टार्टअप इकोसिस्टम, अनुपालन आवश्यकताओं में कमी, सेक्टरवार नियमन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और सिंगल विंडो मंजूरी से जुड़े सुधारों ने कारोबार पर नियामकीय बोझ कम किया है। इन सुधारों के परिणामस्वरूप कारोबार शुरू करने, रोजगार सृजन, निवेश और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

डीपीआईआईटी ने अब तक 2,50,046 स्टार्टअप्स को मान्यता दी है जो 770 से अधिक जिलों और 56 उद्योग क्षेत्रों में फैले हैं। इनमें 25.42 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। विभाग ने कहा है कि 52 प्रतिशत स्टार्टअप्स महानगरों से बाहर के शहरों में स्थित हैं, जबकि 48 प्रतिशत स्टार्टअप में कम-से-कम एक महिला निदेशक हैं।

वित्त वर्ष 2023-24 में 34,200 स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई थी जबकि वर्ष 2024-25 में ऐसी 36,440 इकाइयों को मान्यता दी गयी।

सरकार ने स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के अंतर्गत 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 244 इनक्यूबेटरों के माध्यम से 4,194 स्टार्टअप्स के लिए 775.67 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इनमें 2,147 महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों के 2,356 स्टार्टअप्स शामिल हैं।

स्टार्टअप के लिए निधियों की निधि योजना के अंतर्गत भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने 166 वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के लिए 12,623 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। इन कोषों ने 1,475 स्टार्टअप्स में 28,254 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

स्टार्टअप के लिए ऋण गारंटी योजना के अंतर्गत 1,662.71 करोड़ रुपये के 532 ऋणों को गारंटी प्रदान की गई है। इन ऋणों से लाभान्वित स्टार्टअप्स में 41,637 लोग कार्यरत हैं। प्रति ऋणकर्ता गारंटी कवर की सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि 27 चैंपियन सेक्टरों के लिए वार्षिक शुल्क घटाकर एक प्रतिशत कर दिया गया है।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर स्टार्टअप के पंजीकरण के लिए पूर्व अनुभव, पूर्व कारोबार और अर्नेस्ट मनी डिपोजिट (ईएमडी) संबंधी शर्तों में छूट दी गई है। इसके परिणामस्वरूप ई-मार्केटप्लेस पर पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या जनवरी 2021 के 7,929 से बढ़कर 43,260 हो गई है। इन स्टार्टअप्स ने सरकारी खरीदारों को 68,105 करोड़ रुपये मूल्य के 6.23 लाख ऑर्डर की आपूर्ति की है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्ष 2016 में जहां केवल चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्टार्टअप संबंधी विशेष नीतियां थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 32 हो गई है। इसके अतिरिक्त, 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 104 नए इनक्यूबेटर स्थापित किए गए हैं, जबकि तेजस पहल 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 132 जिलों में संचालित है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि 63 नियामकीय सुधारों से स्टार्टअप वातावरण मजबूत हुआ है। देशभर में कारोबार संबंधी नियमों को सरल बनाने के लिए 47,957 अनुपालन आवश्यकताओं में कमी और 900 कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। इसका लाभ भी इकाइयों को मिला है।

डीपीआईआईटी ने कारोबार में आसानी बढ़ाने के उपायों के अंतर्गत श्रम कानूनों के एकीकरण और लाइसेंस संबंधी सुधारों से अनुपालन प्रक्रिया सरल बनाये जाने का भी उल्लेख किया जिससे कारोबार पर नियामकीय बोझ कम हुआ है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि निवेश के वातावरण में सुधार के बीच पिछले 12 वर्षों में 843 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ है। इस दौरान एफडीआई के लिए स्व:स्वीकृत मार्ग की सुविधा और 17 क्षेत्रों में कर दी गयी है।

विभाग ने बताया है कि राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली पर अब तक 15,49,850 आवेदन प्राप्त हुए हैं, 5,76,778 कारोबारों का पंजीकरण किया गया है और 8.5 लाख से अधिक मंजूरियां प्रदान की गई हैं। इस प्लेटफॉर्म पर कुल 3,779 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें केंद्र सरकार की 327 और राज्य सरकारों की 3,452 सेवाएं शामिल हैं। सितंबर 2021 में इसके प्रारंभिक शुभारंभ के समय केंद्र सरकार की केवल 142 मंजूरियां और 14 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सेवाएं उपलब्ध थीं। वर्तमान में इस प्रणाली के साथ 34 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश तथा केंद्र सरकार के 32 मंत्रालय एवं विभाग एकीकृत हैं। इनमें से 18 केंद्रीय मंत्रालय राष्ट्रीय सिंगल विंडो का उपयोग कर रहे हैं।

विज्ञप्तिके अनुसार “अपनी मंजूरियां जानें” मॉड्यूल कारोबारियों को शुरुआत में ही यह पहचानने में मदद करता है कि उन्हें केंद्र और राज्य स्तर पर किन-किन मंजूरियों की आवश्यकता होगी। इसके माध्यम से 8,000 से अधिक मंजूरियों की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इनमें से 2,825 मंजूरियां-केंद्र सरकार की 592 और राज्य सरकारों की 2,233 मंजूरियां-केवाईए के माध्यम से एकीकृत की गई हैं। बार-बार आंकड़े भरने की प्रक्रिया समाप्त करने के लिए 89 सामान्य डेटा फील्ड को अब 285 मंजूरियों के लिए स्वतः भरने की सुविधा से जोड़ा गया है। उद्यमियों की सुविधा और पहुंच बढ़ाने के लिए यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।

 

 

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