
जबलपुर। भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा के आत्महत्या मामले में आरोपी पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सोमवार को दो चरणों में मैराथन बहस हुई। सीबीआई व राज्य सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए जमानत याचिका का विरोध किया। हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं होने के कारण न्यायालय में दहेज एक्ट की धाराओं के तहत चालान पेश नहीं किया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता की उम्र तथा उनकी बीमारियों का हवाला देते हुए कहा गया कि वह विगत पांच माह से न्यायिक हिरासत में है।
अनेक तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट अप्राप्त
सीबीआई व राज्य सरकार की तरफ से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि जब्त किये गये लैपटॉप, सीसीटीव्ही रिकॉर्डिंग सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रकरण में साक्ष्यों के आधार पर धाराओं को जोड़ा जा सकता है। सीबीआई प्रकरण की जांच कर रही है और साक्ष्य एकत्र किये जा रहे हैं। इसके अलावा याचिकाकर्ता के द्वारा जांच में सहयोग नहीं करते हुए साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास किया गया। एकलपीठ ने दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये। राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा सीबीआई की तरफ से एएसजी अधिवक्ता एस जैन उपस्थित हुए।
