हाईकोर्ट द्वारा सभी थानों में साउंड मीटर और कचरा गाड़ियों की आवाज कम करने के आदेश 

इंदौर। शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस थानों में साउंड मीटर देने और निगम की सभी कचरा गाड़ियों की आवाज कम करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने साइलेंट जोन की सूची प्रस्तुत नहीं करने एवं ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण करने पर असहमति जताई है।

इंदौर हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच में न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने ध्वनि प्रदूषण रिट याचिका क्रमांक 25397/2023 पद संवादी करते हुए अधिकारियों को कई आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस, नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को सभी पुलिस थानों में पुलिसकर्मियों को ध्वनि प्रदूषण मापने वाले साउंड मीटर उपलब्ध कराने, साइलेंस जोन की सूची व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों में प्रकाशित करने और नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों से होने वाले शोर को कम करने के निर्देश दिए हैं।

आज सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व में साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने के निर्देश का उचित पालन नहीं हुआ है। राज्य की ओर से केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों के अंश प्रस्तुत किए गए, जो पर्याप्त नहीं हैं। संबंधित अधिकारियों को साइलेंस जोन की सूची विधिवत प्रकाशित करनी होगी। साथ ही निर्देश दिए है कि ध्वनि प्रदूषण मापने वाला साउंड मीटर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया था, लेकिन उक्त उपकरण का सार्वजनिक स्तर पर उपयोग कार्रवाई करने के लिए अब तक नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर के विभिन्न पुलिस थानों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए। साथ ही पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज की गई शिकायतों का विवरण भी रिकॉर्ड पर रखने के आदेश दिए हैं। उक्त मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को आदेश के पालन की रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

हर वार्ड में दो स्वयंसेवक नियुक्त करने का सुझाव 

ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करने से लोगों के डर को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि हर पुलिस थाने का प्रभारी (एसएचओ) अपने क्षेत्र के हर वार्ड से दो स्वयंसेवकों को नियुक्त करेगा। ये स्वयंसेवक अपने क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण करने वाले व्यक्तियों या वाहनों की जानकारी और घटना का वीडियो मोबाइल से रिकॉर्ड कर पुलिस दे। इससे उन नागरिकों को भी शिकायत दर्ज कराने में मदद मिलेगी, जो सीधे पुलिस के पास जाने में संकोच करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायत मिलने पर पुलिस कानून के अनुसार तुरंत कार्रवाई करे।

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