यूक्रेनी टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में श्री जेलेंस्की ने कहा,” हम बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगर मामला सीमा या क्षेत्रीय संप्रभुता का है, तो उस पर शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही बात होगी। बाकी अन्य मुद्दों पर तकनीकी दल चर्चा कर सकते हैं। इसलिए इन सभी विषयों पर नवंबर में बातचीत की जा सकती है।”
इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए तीनों पक्षों को एक मेज पर लाने की कोशिशें और बातचीत की सुगबुगाहट पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तेज हो रही थी। राजनयिक हलचल में यह तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा शुरू की गई ताजा पहलों के बाद देखने को मिली है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने मंगलवार को ओस्लो में श्री जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं से मुलाकात की थी, जिसके बाद बुधवार को उन्होंने सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बैठक की।
इन बैठकों के तुरंत बाद यूक्रेन-रूस दोनों ने ही अमेरिका की मध्यस्थता में सीधी बातचीत फिर से शुरू करने पर अपनी रजामंदी दे दी।
रूसी शहर सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी दूत विटकॉफ की मुलाकात के बाद पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने संवाददाताओं को बताया कि रूसी राष्ट्रपति 10 नवंबर के बाद वार्ता शुरू करने पर ‘सैद्धांतिक रूप से’ सहमत हो गए हैं। श्री उशाकोव के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य जोर ‘युद्ध की समाप्ति के बाद रूस और यूक्रेन के लिए एक मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा तैयार करने’ पर रहेगा। श्री जेलेंस्की ने भी बातचीत को तेजी से आगे बढ़ाने की अमेरिकी पहल का खुलकर समर्थन किया है। बुधवार देर रात जारी एक ऑडियो संदेश में श्री जेलेंस्की ने कहा, ” वार्ता का एजेंडा बिल्कुल साफ है- युद्ध का खात्मा, शांति की बहाली और जैसा मैं समझ रहा हूं, दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों की बैठक के लिए जमीन तैयार करना। ”
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष की शुरुआत में भी तीनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। जनवरी-फरवरी में दो बार अबू धाबी में और फिर फरवरी के आखिर में जेनेवा में बैठकें हुई थीं।
युद्धबंदियों की अदला-बदली के अलावा हालांकि उन वार्ताओं में कोई खास प्रगति नहीं हो सकी थी, क्योंकि रूस-यूक्रेन अपनी-अपनी बुनियादी शर्तों पर अड़े हुए थे।

