श्री मोदी ने कहा, ‘आज कल युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते। किसी देश को कमज़ोर करना है तो उसकी अर्थव्यस्था पर हमला करके भी ये किया जा सकता है।” श्री मोदी भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने इन सुविधाओं को महाप्रभु जगन्नाथ का एक आशीर्वाद भी बताया।
प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम, मुख्य मंत्री मोहन माझी , रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आरबीआई की इन नयी सुविधाओं का उद्घाटन करते हुए बैंकिंग प्रणाली को साइबर हमले से बचाने की पुख्ता व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा , ” … और जब भारत, आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है तो हमें अपने बैंकिंग सिस्टम को भी साइबर लुटेरों, साइबर आतंकियों से सुरक्षा देनी है।”
श्री मोदी ने कहा, ‘भुवनेश्वर में स्थापित की गयी यह सुविधा वित्तीय प्रणाली को और अधिक सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आरबीआई की इस नयी सुविधा से डिजिटल अवसंरचना और साइबरसुरक्षा की क्षमता पहले से अधिक मजबूत होगी।’ उन्होंने कहा कि नया संस्थान ओडिशा के युवाओं को उनके सपने पूरा करने में सहायक होगा।
प्रधानमंत्री ने विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धि को दोहराते हुए पिछले 12 साल में बैंकों की प्राथमिकता में बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने 2014 से पहले ऊंचे संपर्कवाले धनी लोगों को ‘फोन बैंकिंग’ के जरिए हजारों करोड़ के कर्ज दिये जाने और आज के समय में पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं , मुद्रा ऋण और स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमियों के लिए कर्ज सुविधाओं के विस्तार के बीच फर्क को रेखांकित करते हुए कांग्रेस पर आंक्रमण किया।
उन्होंने कहा पहले दिल्ली के एक परिवार से संपर्क वालों को फोन बैंकिंग से हजारों करोड़ रूपये मिल जाते थे जबकि गरीबों और असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए बैंक का कर्ज सोचा भी नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि जो क्रेडिट और डेबिट कार्ड पहले अमीरों की पहचान थी आज गरीब वर्ग के खाताधारकों को भी सुलभ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फोन बैंकिंग ने भारत के बैंकों को खस्ताहाल बना दिया था आज भारत के बैंक दुनिया के सबसे मजबूत बैंकों में हैं।
श्री मोदी ने कहा , ” बीता दशक,बैंकिंग को उन तक लोगों तक पहुंचाने का था… जो इससे वंचित था। आने वाला दशक… बैंकिंग को अधिक दक्ष, अधिक भरोसेमंद बनाने का है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने एक जनोन्मुख, सजग और अच्छे राजकाज का मॉडल लेकर यात्रा शुरू की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ओडिशा की धरती से ही दिये गये उस प्रसिद्ध वाक्य को भी याद किया जिनमें उन्होंने कहा था कि ‘हम दिल्ली से एक रूपया भेजते है तो लाभार्थी तक केवल 15 पैसा पहुंच पाता है।’
श्री मोदी ने कहा आज हम दिल्ली से जब एक रूप भेजते हैं तो वह पूरा का पूरा एक रूपया लाभार्थी के खाते में पहुंचता है। उन्होंने कहा, ‘ हमारे लिए विकास का मतलब है… भारत का संतुलित विकास… गांवों को भी अवसर…छोटे शहरों को भी अवसर:जिसके पास बैंक को गारंटी देने के लिए कुछ भी नहीं है, वो भी आज बैंक से सस्ता और सुलभ कर्ज लेकर अपना कोई काम शुरू कर पा रहा है।’
