सीहोर। जिले के कोटवारों ने फटी वर्दी पहनकर काम करने से साफ इंकार कर दिया है. कोटवारों की हड़ताल का असर अब राजस्व के कामों में दिखाई दे रहा है.
गौरतलब है कि कोटवार तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय स्थित टाउन हॉल के पास प्रदर्शन कर रहे हैं. कोटवार सेवाभूमि का मालिक बनाने, सरकारी कर्मचारी घोषित करने और वर्दी की राशि बैंक खाते में ही देने की मांग सरकार से कर रहे हंै. हड़ताल शनिवार को भी जारी रही. सभी गांव के प्रमुख ग्राम चौकीदार कोटवार हड़ताल में शामिल रहे.
इधर कोटवारों की हड़ताल से किसानों के सीमांकन बटवारा कब्जा दिलाने जैसी कार्यवाहियों के साथ कोटवारों के माध्यम से किसानों को भेजे जाने वाली सूचनाओं का आदान-प्रदान भी बंद हो गया है. ग्राम कोटवार के बिना तहसीलदार,आरआई, पटवारी कोई भी राजस्व विभाग का जमीनी काम नहीं कर पा रहे हैं जिस कारण किसानों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. संघ के आह्वान पर पूरे प्रदेश में कोटवारों द्वारा की जा रही हड़ताल के तहत जिले के कोटवार भी 28 अक्टूबर तक हड़ताल पर बैठ गए हैं. संघ के जिला अध्यक्ष छगनलाल मालवीय ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोटवारों को पुलिस की तरह खाकी वर्दी उपलब्ध कराई थी लेकिन उनके केन्द्र में जाने के बाद वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. कोटवारों को दी गई वर्दी फट चुकी है गल चुकी है. राजस्व विभाग के द्वारा दी जा रही सिली हुई वर्दी पहनने के लायक नहीं है.
जिला अध्यक्ष मालवीय ने कहा कि हमारे बुजुर्ग भी सरकार की सेवा करते आए हैं . बावजूद इसके हमें मामूली वेतन दिया जा रहा है और सरकारी कर्मचारी भी घोषित नहीं किया जा रहा है. सेवा भूमि पर भी कोटवारों को मलिकाना हक नहीं दिया जा रहा है. जिसके चलते कोटवारो का भविष्य अंधकार में बना हुआ है. धरना प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष कालूराम, तहसील अध्यक्ष अमर सिंह, उपाध्यक्ष राकेश मालवीय, लालू सेन, राजमल, जितेंद्र, गोपाल सिंह, रामभरोस, मांगीलाल, राधेश्याम, आनंद, संतोष मालवीय, गोपाल सिंह अहिरवार,अजबसिह, मंगीलाल खुशीलाल आदि शामिल हैं.
