कोच्चि, 25 अक्टूबर (वार्ता) आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने महाराष्ट्र में मछुआरों और आदिवासी समुदायों को पांच लाख हरे मसल बीज की आपूर्ति की हैं, जिससे छह महीने के अंदर कुल आपूर्ति 10 लाख हो गई है।
सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महाराष्ट्र के तट पर टिकाऊ द्विकपाटीय जलीय कृषि को बढ़ावा देकर समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान को रोजगार के अवसरों में बदलना है।
उन्होंने बताया कि दो-चार मिलीमीटर के हरे मसल के बीज संस्थान के तिरुवनंतपुरम में विझिंजम क्षेत्रीय केन्द्र में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत तैयार किए गए थे।
इसके अलावा संस्थान के मद्रास क्षेत्रीय केन्द्र में तैयार किए गए एक लाख शीप के बीज महाराष्ट्र को आपूर्ति किए गए ताकि राज्य में शीप कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।
इस पहल से मछुआरों और आदिवासी समुदायों के लिए रोज़ी-रोटी के मौकों में विविधता आने की उम्मीद है, साथ ही विज्ञान पर आधारित तटीय जल कृषि के तरीकों को बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना के हिस्से के तौर पर प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एम.के. अनिल के नेतृत्व में संस्थान की एक वैज्ञानिक टीम ने महाराष्ट्र के मैंग्रोव सेल के 30 अधिकारियों को नर्सरी में घोंघा और सीप पालने और खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अधिकारियों से उम्मीद है कि वे स्थानीय समुदायों को तकनीकी जानकारी और खेती के तरीकों के स्थानांतरण में मदद करेंगे।
