सिनेमा मनोरंजन नहीं, हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक स्मृति को पुनर्जीवित करने का माध्यम

उज्जैन। भारतीय संस्कृति, इतिहास, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को सिनेमा के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026 का भव्य शुभारंभ सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में हुआ।

विश्व संवाद केंद्र मालवा एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त 232 लघु फिल्मों और 8 अंतरराष्ट्रीय प्रविष्टियों में से विशेषज्ञ निर्णायक मंडल द्वारा चयनित 35 बेहतरीन फिल्मों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं रंगकर्मी संजय मेहता मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार ने अपने संबोधन में कहा कि मोद और बोध दोनों के साथ भारत की बात करने वाले सिनेमा की जरूरत है। हमारी फिल्मों में भारत का सत्य सामने आना चाहिये, हमारे गौरवशाली अतीत के चित्रण के साथ ही, वर्तमान विकृतियां भी सामने आना चाहिये, परंतु इनका उद्देश्य भी भारत के भाव का संरक्षण ही होना चाहिये। हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में हमारे सिनेकर्मियों को आगे आना होगा।

उद्घाटन सत्र में अभिनेता संजय मेहता ने वैचारिक संघर्ष में सिनेमा की भूमिका के महत्व को प्रतिपादित किया। उज्जैनी शार्ट फिल्म फेस्टिवल के प्रथम दिन फिल्म निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने फिल्म निर्माण और निर्देशन की गहराइयों पर बात करते हुए सिनेमा निर्माण के लिये सामाजिक अनुभूति और सामाजिक उद्देश्य का समझ को आवश्यक बताया। स्क्रीनप्ले लेखक शैलेष प्रताप सिंह ने स्क्रिप्ट लेखन के लिये अध्ययन और शोध के महत्व पर संवाद किया। दिलीप लोकरे ने सत्र को संबोधित किया। सिनेमा आज के समय में केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यताओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को संजोने तथा उसे पुनर्जीवित करने का एक प्रभावी माध्यम है।

विशेष सत्र और मास्टरक्लास आयोजित

मंचोत्सव के दौरान दोनों दिन विभिन्न विषयों पर विशेष सत्र और मास्टरक्लास आयोजित किए जा रहे हैं। प्रथम दिवस पर फिल्म निर्माण एवं निर्देशन पर श्री कामाख्या नारायण सिंह, स्टोरी टू स्क्रिप्ट पर शैलेष प्रताप सिंह, आवाज और अभिनय पर श्री विजय विक्रम सिंह तथा लघु फिल्म निर्माण पर श्री दिलीप लोकरे ने मार्गदर्शन दिया। वहीं द्वितीय दिवस पर दीपक दुआ, राजेश तेलंग तथा भाषा सुंबली अपने विचार एवं मास्टरक्लास प्रस्तुत करेंगे। अंत में समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह कुलगुरु प्रो अर्पण भारद्वाज के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होगा।

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