वनवास’ का अंत: आम्रपाली के फेज़-I की अंतिम रुकी हुई परियोजनामें घरों का पोजेशन मिलना शुरू

किराये और ईएमआई के दोहरे बोझ से अपने घर तक का सफर: इसत्योहारी मौसम में आदर्श आवास योजना के 51 परिवारों को पोजेशनपत्र सौंपे गए। इसके साथ ही आम्रपाली की सभी रुकी हुईपरियोजनाओं में घरों का हस्तांतरण शुरू हो गया है।

एनबीसीसी ने 38,000 आवासीय इकाइयों वाली रुकी हुईपरियोजनाओं को पूरा कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

 त्योहारों के इस सीजन में उन परिवारों के लिए खुशियों का नया अध्यायशुरू हुआ है, जो वर्षों से एक साथ किराया और होम लोन की ईएमआईचुकाने को मजबूर थे। अब इन परिवारों को अपने घरों के स्वामित्व से जुड़ेदस्तावेज मिल रहे हैं और उनका वर्षों का प्रतीकात्मक ‘वनवास’ समाप्तहो रहा है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के टेक ज़ोन IV स्थित लीजर वैली आदर्श आवासयोजना में आयोजित एक समारोह में भारत के अटॉर्नी जनरल एवं माननीयन्यायालय द्वारा नियुक्त रिसीवर (आम्रपाली), श्री आर. वेंकटरमणि तथाएनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, डॉ. के.पी.महादेवस्वामी ने 51 घर खरीदारों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) औरकब्जा पत्र सौंपे। यह उन्हें उनके घरों की चाबियां मिलने से पहले कीअंतिम प्रक्रिया है।

आदर्श आवास योजना आम्रपाली की उन रुकी हुई परियोजनाओं मेंअंतिम थी, जहां घर खरीदारों को कब्जा सौंपने की प्रक्रिया अभी शुरू नहींहुई थी। इस समारोह (दिनांक 23.10.2026 के देर संध्या में आयोजित)के साथ, सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एनबीसीसी द्वारा पूरी की जारही आम्रपाली की सभी रुकी हुई परियोजनाओं में घरों का हस्तांतरण शुरूहो चुका है।

इस समारोह में आम्रपाली कोर्ट कमेटी के सदस्य श्री रवि भाटिया और श्रीडी.के. मिश्रा; एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के निदेशक (वाणिज्यिक), डॉ. सुमन कुमार; कोर्ट रिसीवर कार्यालय एवं एस्पायर (ASPIRE) केअधिकारी; एनबीसीसी के वरिष्ठ अधिकारी; आदर्श आवास योजना कीतदर्थ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के सदस्य तथा घर खरीदारऔर उनके परिवार भी उपस्थित रहे।

लंबा इंतजार हुआ समाप्त

इन परिवारों ने अपने जीवन भर की बचत और कई मामलों में होम लोनकी रकम अपने घर के सपने को साकार करने में लगा दी थी। लेकिन जबपरियोजना ठप हो गई, तो अनेक परिवारों को हर महीने, साल–दर–सालहोम लोन की ईएमआई और मकान का किराया दोनों चुकाने पड़े। उन्हें यहभी नहीं पता था कि उनकी मेहनत की कमाई कभी वापस मिलेगी या नहीं।

इंतजार के इन वर्षों में बच्चों का बचपन बीत गया और माता–पितासेवानिवृत्त हो गए।

इन परिवारों के लिए कब्जा पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है। यहकिराये और ईएमआई के दोहरे आर्थिक बोझ से मुक्ति तथा वर्षों कीअनिश्चितता के बाद सुरक्षा और स्थायित्व का प्रतीक है। अब ये परिवारअपने नए घर में जाने की योजना बना सकते हैं और आने वाले त्योहारअपने घर की छत के नीचे मना सकते हैं।

जीवनभर के लिए बनाए गए आधुनिक आवास

टेक ज़ोन IV में 5.1 एकड़ में फैली आदर्श आवास योजना में आठ टावरहैं, जिनकी ऊंचाई 33 मंजिल तक और लगभग 118 मीटर तक है।परियोजना का कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 25.8 लाख वर्ग फुट है।

इस परियोजना में कुल 1,904 अपार्टमेंट हैं, जो पांच प्रकार के लेआउट मेंउपलब्ध हैं यथा, 975 वर्ग फुट — 2 बेडरूम + 2 शौचालय, 1,000 वर्गफुट — 2 बेडरूम + 2 शौचालय, 1,100 वर्ग फुट — 2 बेडरूम + 2 शौचालय + स्टडी रूम, 1,220 वर्ग फुट — 3 बेडरूम + 2 शौचालय एवं1,300 वर्ग फुट — 3 बेडरूम + 2 शौचालय । परियोजना के निवासियोंको आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, टेनिस एवं बैडमिंटन कोर्ट, हाफ बास्केटबॉल कोर्ट, जिम, योग एवं ज़ुम्बाकक्ष, सामुदायिक एवं बहुउद्देशीय हॉल, इनडोर गेम्स और बच्चों के खेलनेका क्षेत्र शामिल हैं।

परियोजना में पर्यावरणीय स्थिरता का भी विशेष ध्यान रखा गया है।इसके अंतर्गत 780 KLD क्षमता का जल उपचार संयंत्र, 930 KLD क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था कीगई है, जिससे जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जासके।

निर्माण कार्य में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकतकनीकों का उपयोग किया गया है। इनमें एल्युमिनियम शटरिंग, जिप्समप्लास्टर तथा UPVC दरवाजे और खिड़कियां शामिल हैं।

आम्रपाली परियोजनाओं का पुनरुद्धार: भरोसे से बने घर

एनबीसीसी अब अपने दायरे में आने वाली सभी 24 आवासीयपरियोजनाओं के प्रथम चरण (फेज–1) को पूरा करने के करीब है।

एनबीसीसी के दायरे में आने वाली लगभग 37,250 आवासीय इकाइयों मेंसे करीब 35,000 इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका है और लगभग23,700 इकाइयों का कब्जा घर खरीदारों को सौंपा जा चुका है।

दूसरे चरण में एफएआर (FAR) परियोजनाओं के अंतर्गत लगभग 8,200 इकाइयों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इनके वर्ष 2028 तकपूरा होने की उम्मीद है।

30 सितंबर 2026 तक लगभग ₹13,000 करोड़ के निर्माण कार्य पूरे किएजा चुके हैं। इसमें प्रथम चरण के लगभग ₹8,300 करोड़ और एफएआरपरियोजनाओं के लगभग ₹4,700 करोड़ के कार्य शामिल हैं।

तमाम चुनौतियों के बावजूद पूरा हुआ निर्माण

एनबीसीसी के सामने आम्रपाली परियोजनाओं को बिना किसी अग्रिमवित्तीय सहायता के पूरा करने की चुनौती थी। मार्च 2020 से मई 2022 केबीच कोविड–19 प्रतिबंधों के कारण निर्माण कार्य कई बार बाधित हुआ।

परियोजनाओं के लिए धन की व्यवस्था केवल घर खरीदारों से मिलनेवाली बकाया राशि, इकाइयों की बिक्री और सावधानीपूर्वक लिए गएबैंक ऋणों के माध्यम से की गई।

निर्माण अनुबंध वर्ष 2018 की दरों पर बने हुए थे, जबकि लागत में 30 से40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई और स्टील की कीमतें दोगुनी हो गईं।

इसके अतिरिक्त, एनबीसीसी को 8,440 डिफॉल्टर घर खरीदारों कीपहचान करनी पड़ी, उनकी इकाइयों को रद्द कर दोबारा बेचना पड़ा तथाअधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए अनिच्छुक ठेकेदारों को तैयारकरना पड़ा। निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंजिलकी बारीकी से जांच भी की गई।

एनबीसीसी ने चुनौतियों को खुशियों में बदला

एनबीसीसी ने एक ठप पड़ी आवासीय परियोजना को दोबारा जीवंत करहजारों परिवारों के घर का सपना साकार किया है। अब तक लगभग35,000 फ्लैट तैयार किए जा चुके हैं और करीब 23,700 परिवार अपनेघरों का कब्जा प्राप्त कर चुके हैं। एनबीसीसी के दायरे में शेष फ्लैटों कानिर्माण भी जल्द पूरा करने का लक्ष्य है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घर खरीदारों को फ्लैट मूल आम्रपाली दरोंपर उपलब्ध कराए गए हैं। निर्माण लागत में हुई वृद्धि का अतिरिक्त बोझघर खरीदारों पर नहीं डाला गया। यहां तक कि जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत होने का अतिरिक्त भार भी घर खरीदारों सेनहीं लिया गया।

इस पुनरुद्धार अभियान से लगभग 8.5 करोड़ मानव–दिवस का रोजगारसृजित हुआ है। इसमें 4.5 करोड़ प्रत्यक्ष और 4 करोड़ अप्रत्यक्षमानव–दिवस शामिल हैं।

इस परियोजना से अब तक लगभग ₹2,000 करोड़ का जीएसटी राजस्वप्राप्त हुआ है, जो परियोजना पूरी होने पर बढ़कर लगभग ₹3,200 करोड़होने की उम्मीद है। इसके अलावा, फ्लैटों की लागत पर 6 प्रतिशत की दरसे लगभग ₹1,200 करोड़ का स्टांप शुल्क भी प्राप्त हुआ है।

एफएआर परियोजनाओं के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को₹965 करोड़ का भुगतान किया गया है। वहीं, एनपीसीएल (NPCL), यूपीपीसीएल (UPPCL) और अन्य संबंधित संस्थाओं को लगभग ₹100 करोड़ का भुगतान किया गया है।

इन प्रयासों से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के आवासीय बाजार में भरोसादोबारा मजबूत हुआ है।

यदि एनबीसीसी ने इन परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी नहींसंभाली होती, तो लगभग 38,000 अधूरे फ्लैट समय के साथ जर्जर होसकते थे। इनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹20,000 करोड़ थी, जिसकीगणना प्रति फ्लैट औसतन ₹50 लाख के आधार पर की गई है।

ऐसी स्थिति में हजारों परिवारों की जीवनभर की बचत और होम लोन कीरकम नुकसान में बदल सकती थी, बैंकों के गैर–निष्पादित परिसंपत्तियों(NPA) का बोझ बढ़ सकता था और जमीन लंबे समय तक कानूनीविवादों में फंसी रह सकती थी।

आज वही अधूरे फ्लैट उपयोगी आवासीय संपत्तियों में बदल चुके हैं औरएफएआर परियोजनाओं के माध्यम से अर्थव्यवस्था में नई परिसंपत्तियांजुड़ रही हैं।

एनबीसीसी के प्रयासों ने न केवल हजारों परिवारों को उनके घर लौटाएहैं, बल्कि वर्षों से टूटते भरोसे को भी नई मजबूती दी है। जिन परिवारों नेलंबे समय तक अनिश्चितता में जीवन बिताया, उनके लिए अब अपने घरमें प्रवेश करना केवल एक संपत्ति प्राप्त करना नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षाऔर नई शुरुआत का अवसर है।

 

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