26 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे जीवन, 60 फिल्मों में निभाया एक जैसा रोल, फिर ऐसे बने बॉलीवुड का जाना-माना चेहरा

Jeevan Actor Birthday Special: मुंबई,  बचपन में माता-पिता का साथ छूटने के बाद सिर्फ 26 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे जीवन ने कई फिल्मों में विलेन और नारद मुनि का रोल निभाकर फिल्म इंडस्ट्री में अमिट छाप छोड़ी।

  • बचपन में खोया मां-बाप का साथ, जीवन ने कम उम्र में ही किया मुश्किलों का सामना।
  • जेब में 26 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे, और फिर मायानगरी में अपनी किस्मत आजमाई।
  • 60 फिल्मों में निभाए एक जैसे रोल, उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।
  • जीवन ने अपनी एक्टिंग से बॉलीवुड में खलनायक के रूप में खास पहचान हासिल की।

फिल्म इंडस्ट्री के बड़े पर्दे पर जब भी किसी खतरनाक खलनायक या फिर पौराणिक कहानियों के किसी खास रोल का जिक्र होता है, तो जेहन में कई जाने-माने चेहरे उभर आते हैं। कुछ ऐसे भी कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने काम से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी और अपनी एक अलग पहचान बनाई।

दिग्गज एक्टर जीवन भी इसी लिस्ट में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी एक्टिंग के दम पर बॉलीवुड में एक लंबी और शानदार पारी खेली। उनका यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें संघर्ष के कांटे और सफलता की धूप दोनों शामिल थीं।

बचपन में ही छूट गया अपनों का साथ
जीवन का जन्म 24 अक्टूबर 1915 को श्रीनगर के एक कश्मीरी पंडित फैमिली में हुआ था। उनके जीवन की शुरुआत ही संघर्षों के साये में हुई क्योंकि उनके जन्म के समय ही उनकी मां ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। जब वे महज तीन 3 साल के थे, तब उनके पिता का भी निधन हो गया।

इस तरह बचपन में ही माता-पिता का साथ छूट जाने के बाद उनके सामने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं। परिवार में एक्टिंग या फिल्मों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था और उस दौर में इस क्षेत्र को अच्छा नहीं माना जाता था। लेकिन उनके अंदर एक्टिंग के लिए एक अलग ही दीवानगी थी जो हर मुश्किल को पार करने की जिद बन चुकी थी।

जेब में बचे थे कुछ रुपये और सपनों की उड़ान
एक्टिंग के लिए इसी गहरी लगन ने उन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। वेशोभा और परंपराओं के बंधनों को तोड़कर लगभग 18 साल की उम्र में घर से निकल पड़े। उनके पास मुंबई तक का सफर तय करने के लिए केवल 26 रुपये थे। उस दौर के बंबई शहर में पैर जमाना किसी नौसिखिए के लिए आसान नहीं था।

उन्हें अपना जीवन चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ा और शुरुआती दौर में एक स्टूडियो में काम करना शुरू किया। वहां वे रिफ्लेक्टर पर सिल्वर पेपर चिपकाने का काम करते थे, जिससे उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियों को बहुत करीब से देखने और समझने का मौका मिला।

स्टूडियो के छोटे से काम ने बदल दिया करियर
किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था और एक्टर जीवन की यही मेहनत रंग लाई। स्टूडियो में काम करने के दौरान फिल्म डायरेक्टर मोहनलाल सिन्हा की नजर उन पर पड़ी और उन्हें एक्टिंग का पहला मौका मिल गया। उन्होंने अपनी पहली फिल्म फैशनेबल इंडिया से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और यहीं से उनके करियर का रास्ता खुल गया।

उन्होंने अपने एक्टिंग के सफर में कई अलग-अलग तरह के रोल निभाए। खास तौर पर पौराणिक फिल्मों में उनके द्वारा निभाया गया नारद मुनि का रोल सबसे बड़ी पहचान बन गया। उन्होंने करीब 59 से 60 फिल्मों में इसी एक जैसे पौराणिक रूप को पर्दे पर जीवंत किया।

विलेन के अंदाज से दर्शकों के दिलों पर किया राज
पौराणिक किरदारों के अलावा उन्होंने हिंदी सिनेमा में कुख्यात विलेन की भूमिकाएं भी बख़ूबी निभाईं। उनकी अनोखी डायलॉग डिलीवरी और चेहरे के भाव दर्शकों के दिलों में खौफ और सम्मान दोनों पैदा कर देते थे। देव आनंद की फिल्म जॉनी मेरा नाम में काम करके अपने रोल को यादगार बनाया था।

अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर स्टारर फिल्म अमर अकबर एंथनी और धर्म वीर जैसी सफल फिल्मों में उनके नेगेटिव किरदारों को आज भी याद किया जाता है। एक्टर जीवन ने अपने लंबे फिल्मी सफर में यह साबित कर दिया कि अगर इरादे पक्के हों तो अभावों के बावजूद सफलता हासिल की जा सकती है। उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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