
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर सहित परिसर में स्थित अन्य मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इसके लिए 10 करोड़ 27 लाख रुपए की राशि खर्च की जा रही है।
महाकाल मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन मंदिरों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ाने, पुरानी संरचनाओं की मरम्मत करने और धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से होने वाले इन कार्यों में मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ परिसर की आरसीसी संरचनाओं की मरम्मत भी शामिल है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे इन कार्यों में परियोजना प्रबंधन परामर्श एजेंसी के रूप में सीबीआरआई और निर्माण एजेंसी के रूप में एएआईसी की भूमिका निर्धारित की गई है। दोनों एजेंसियों के माध्यम से मंदिर परिसर में जीर्णोद्धार और मरम्मत संबंधी कार्य किए जाएंगे। विशेष रूप से उन संरचनाओं पर ध्यान दिया जाएगा, जिनकी मजबूती बनाए रखने के लिए आवश्यक मरम्मत की जरूरत है। आरसीसी से निर्मित संरचनाओं की मरम्मत भी इसी योजना का हिस्सा है। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच महाकाल मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों का विशेष महत्व है। सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। ऐसे में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, मजबूती और रखरखाव भी महत्वपूर्ण विषय है। महाकाल मंदिर परिसर में 10.27 करोड़ रुपए की लागत से किए जा रहे जीर्णोद्धार कार्य धार्मिक धरोहरों के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
संरक्षण योजना तैयार
महाकाल की नगरी उज्जैन देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भगवान महाकाल के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। महाकाल मंदिर के साथ परिसर में स्थित अन्य प्राचीन मंदिरों का भी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। समय के साथ मंदिरों और परिसर की विभिन्न संरचनाओं के रखरखाव तथा मरम्मत की आवश्यकता को देखते हुए इनके संरक्षण की योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत मंदिरों की मजबूती और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जीर्णोद्धार संबंधी कार्य किए जा रहे हैं।
मजबूती और सुरक्षा
महाकालेश्वर मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि उज्जैन की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। मंदिर परिसर में स्थित अन्य देवालय भी इस धार्मिक विरासत का हिस्सा हैं। ऐसे में जीर्णोद्धार के दौरान मंदिरों की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए उनके संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पुरानी संरचनाओं की मरम्मत करना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए मजबूत और सुरक्षित बनाए रखना भी है। ताकि इसका वैभव भी बरकरार रहे और आकर्षक भी लगे।
