स्वदेशी मेला एवं दीपोत्सव 2026: ग्वालियर में पहली बार ‘स्वदेशी ग्राम’, गांव की परंपरा और नवाचार का संगम

ग्वालियर, ग्वालियर व्यापार मेला परिसर में आयोजित ‘स्वदेशी मेला एवं दीपोत्सव 2026’ का मुख्य आकर्षण इस बार ‘स्वदेशी ग्राम’ है, जो ग्रामीण भारत की संस्कृति, परंपरा, कौशल और आत्मनिर्भरता को एक साथ प्रस्तुत कर रहा है। स्वदेशी जागरण मंच ग्वालियर, कैट ग्वालियर और ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह मेला 4 नवंबर तक चलेगा।

शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में मेला संयोजक एवं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र जैन, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक सिंह जादौन, मेला संयोजक आरपी माहेश्वरी तथा लाल टिपारा आदर्श गौशाला के संत ऋषभ देवानंद महाराज ने मेले के उद्देश्य और विशेषताओं की जानकारी दी। इस अवसर पर देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर भी उपस्थित रहे।

स्वदेशी उत्पादों को बाजार

कैट के प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने कहा कि भारतीय उत्पादों को देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मेले में लघु उद्योगों, स्टार्टअप्स, स्वयं सहायता समूहों और मेक इन इंडिया से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शनी एवं बिक्री का अवसर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्वालियर में पहली बार लग रहे इस मेले में बाजरे की रोटी, मक्के का भुट्टा, हस्तशिल्प, हैंडलूम, देसी वाहन, स्वदेशी झूले और ओपन-एयर रेस्टोरेंट सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण होंगे। मेले में ऑटोमोबाइल और स्वास्थ्य सुविधा सहित विभिन्न क्षेत्रों के स्टॉल लगाए गए हैं।

मेला संयोजक आरपी माहेश्वरी ने कहा कि स्वदेशी का उद्देश्य भारतीय उत्पादों के निर्माण, उपयोग और बिक्री को बढ़ावा देना है। उन्होंने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन देशी उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करने हेतु अपना आंदोलन जारी रखेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर

ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक सिंह जादौन ने कहा कि खेती, पशुपालन, दूध-दही और ग्रामीण उद्यम देश की अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार हैं। गांवों के स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग रोजगार सृजन और ग्रामीण आर्थिक सक्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

संत ऋषभ देवानंद महाराज ने कहा कि स्वदेशी ग्राम में भारतीय कला, कौशल, परंपरा और नवाचार का संगम देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रयास बच्चों और युवाओं को ग्रामीण जीवनशैली एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मदद करेगा।

‘स्वदेशी ग्राम’ की झलक

मेले में तैयार किए गए स्वदेशी ग्राम में गोबर से लिपे आंगन, बांस-फूस की झोपड़ियां, कुम्हार का चाक, मिट्टी के बर्तन, बैलगाड़ी, खटिया और ग्राम चौपाल ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक पेश कर रहे हैं। इसके नौ आयामों में स्मार्ट गौशाला एवं गौसंरक्षण, सौर ऊर्जा व बायो सीएनजी, गोबर आधारित उत्पाद, पारंपरिक कृषि, ग्राम पंचायत, देसी भोजन, आध्यात्मिक केंद्र, औषधीय पौधों की वाटिका तथा ग्रामीण झोपड़ी का अनुभव शामिल है। आयोजकों के अनुसार मेले में लगभग 200 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें कुटीर उद्योग, लघु उद्योग, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, स्वदेशी ऑटोमोबाइल और स्टार्टअप उत्पाद शामिल हैं। मेले के दौरान सैलानियों को विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

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