
ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
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लगता है कि अब कांग्रेस भी उसी मॉडल पर काम कर रही है, जिसे अपनाते हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तीन दशक से कांग्रस का अभेद्य दुर्ग बनी लहार और पिछोर सीट को कब्जाया था। सूत्रों की मानें तो पिछले कई दशकों से लगातार हारती आ रही विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस ने विशेष माइक्रो प्लानिंग शुरू की है। इस मॉडल पर काम करते हुए कांग्रेस की टीम इन सीटों पर घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का भौतिक सत्यापन करेगी। अगर यह मॉडल कामयाब रहा तो इसे प्रदेश की अन्य डी-ग्रेड सीटों पर भी अमल में लाया जा सकता है।ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस को चुनौती मुख्य रूप से उन सीटों पर है जहां सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद समीकरण बदले हैं या जहां भाजपा के कद्दावर नेता और स्थानीय क्षत्रपों का खासा प्रभाव है। ग्वालियर, ग्वालियर दक्षिण और भिंड-मुरैना की कुछ सीटों पर कांग्रेस को भीतरघात और मजबूत भाजपा उम्मीदवारों जैसे प्रद्युमन सिंह या नारायण सिंह कुशवाहा के कारण कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ता रहा है। इन सीटों पर माइक्रो प्लानिंग लागू करने पर मंथन चल रहा है।
सिंधिया को दिग्विजय की ओर से पटवारी दे रहे जवाब
सिंधिया ने दिग्विजय को 2020 का ऑपरेशन लोटस याद दिलाया तो एक हजार किमी लंबी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर निकले दिग्विजय ने उसी कड़े अंदाज में जवाब देने से परहेज किया लेकिन इस कमी को आज ग्वालियर में जीतू पटवारी ने पूरा कर दिया। उन्होंने आज सिंधिया के ही शहर में उन्हें चुनौती देते हुए कह दिया कि 2020 के अपराध का कांग्रेस 28 में सुधार करेगी। गौरतलब है कि सिंधिया के नेतृत्व में ऑपरेशन लोटस चलाकर 2020 में कमलनाथ की पंद्रह महीने पुरानी सरकार गिरा दी गई थी। एक ओर सिंधिया कांग्रेस नेताओं का यह छह साल पुराना जख्म कुरेदने में जुटे हैं वहीं पटवारी ने जवाबी जंग का मोर्चा संभाल लिया है। इधर, ग्वालियर से तमाम कांग्रेस नेता दिग्विजय की उज्जैन टू अयोध्या यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं। खास बात यह कि दिग्विजय जिन पांच नदियों का जल ले जा रहे हैं, उसमें चंबल शामिल नहीं है।
धाकड़ हुए गांधीवादी लेकिन धर्मपत्नी गुस्से में
शीतला माता हादसे के बाद अपने ऊपर हुए हमले के बाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. धाकड़ ने कोई जुबानी प्रतिकार न करते हुए गांधीवादी अंदाज अपनाया, हड़ताल पर बैठ गए जूनियर डॉक्टरों को भी किसी तरह मनाकर वापस ले आए लेकिन उनकी धर्मपत्नी अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पा रहीं। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा को लेकर घोर चिंता जताते हुए एक तरह से पुलिस और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है। उन्हें इस बात पर अचंभा है कि इतना पुलिस फोर्स और सरकारी लवाजमा होते हुए भी उनके पति को निशाना कैसे बना दिया गया ! पुलिस और प्रशासन अब तक उनकी चिंताओं और गुस्से को दूर नहीं कर सका है।
अब मुसीबत में फंस गए बाबू
सूबे को राजस्थान से जोड़ने वाली पट्टी पर स्थित श्योपुर के कांग्रेसी विधायक बाबू जंडेल अपने बयानों, अनोखे विरोध प्रदर्शनों और अजीबोगरीब हरकतों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके इन अनूठे तौर-तरीकों को काफी चर्चा मिलती है। जेल से लेकर विधानसभा परिसर तक कुर्ता फाड़कर विरोध प्रदर्शन करने के चलते उन्हें ‘कुर्ता फाड़ विधायक’ भी कहा जाता है। विधानसभा परिसर में आधे घंटे तक शीर्षासन लगा चुके हैं। जनता की भलाई के लिए उन्होंने अजीब ख्वाहिश जताई थी कि जनता उन्हें गधे पर बैठाकर जुलूस निकाले। वे कभी सांप गले में डालकर घूमते हैं तो कभी अचानक जंगल में जाकर बंदरों के साथ रक्षाबंधन मनाते हैं। यहां तक तो ठीक है लेकिन इस बार वे वाकई में मुसीबत में फंस गए हैं। श्योपुर के सियासी गलियारों में पिछले महीने भर से एक अश्लील वीडियो तैर रही है, विरोधियों को उन्हें घेरने के लिए नया हथियार मिल गया है। विधायक महोदय ने इसे एआई से बनाए जाने की बात कहते हुए खुद के चरित्रवान होने की सौगंध खाते हुए ऐलान कर दिया है कि जांच करा लें, वीडियो सच निकला तो न सिर्फ इस्तीफा दे देंगे बल्कि खुद को गोली मारकर जान दे देंगे। हम तो यही दुआ करेंगे कि जो विधायक कह रहे हैं, जांच में वही निकले।
