गिरफ्तारी आदेश जारी करने पर आयुक्त रीवा को नोटिस

जबलपुर:संभागायुक्त रीवा के द्वारा पीटीआई एनडीपीएस एक्ट के तहत 6 माह के लिए भोपाल जेल में निरुद्ध किये जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि उसके अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए संभागायुक्त रीवा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
रीवा निवासी ओम प्रकाश गुप्ता की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि संभागायुक्त ने 5 अक्टूबर 2026 को उसे पीटीआई एनडीपीएस एक्ट में तहत निरूद्ध करते हुए भोपाल केंद्रीय जेल में निरुद्ध करने के आदेश जारी किये थे। संभागायुक्त के उक्त आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया था कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 20 तथा 22 के खिलाफ है।
याचिका में कहा गया था कि उस पर आरोप है कि वह विगत दस साल से मादक पदार्थ गांजा की अवैध कारोबार में संलिप्त है। प्रकरण में सिर्फ उसके खिलाफ साल 2025 से 2026 के बीच दर्ज चार प्रकरणों को उल्लेख किया गया था। जिसमें गांजा की मात्रा 80 ग्राम से 5 किलो के बीच थी। दो प्रकरणों में गांजा उसके पास जब्त होना बताया गया। दो प्रकरण में पकड़े गये अभियुक्त के द्वारा नाम लिये जाने पर आरोपी बनाया गया है। याचिका में कहा गया था कि न्यायालय द्वारा उसे कभी सजा से दंडित नही किया गया है।
याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक तिवारी ने पैरवी करते हुए तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता को उक्त आदेश के खिलाफ प्रदेश के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील करने समय प्रदान नही किया गया। याचिकाकर्ता को गिरफ्तार करते हुए केन्द्रीय जेल भोपाल में निरुद्ध कर दिया गया। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए संभागायुक्त भोपाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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