विश्वविद्यालय ने बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि समिति 2006 में छात्र संघ भंग किए जाने की परिस्थितियों, इससे संबंधित सक्षम न्यायालयों के विभिन्न आदेशों और लिंगदोह समिति (2007) की सिफारिशों पर विचार करेगी।
जामिया में अंतिम छात्र संघ वर्ष 2006 में भंग कर दिया गया था। विश्वविद्यालय ने कहा कि इसके बाद बीते दो दशकों में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में मौजूदा कानूनी और संस्थागत ढांचे के संदर्भ में इस मामले की समीक्षा जरूरी हो गई है। समिति जामिया में छात्र संघ चुनावों से संबंधित मौजूदा न्यायिक आदेशों, देशभर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र संगठनों तथा छात्र संघ चुनावों पर लिंगदोह समिति की सिफारिशों और जामिया के लागू अध्यादेशों एवं नियमों की भी समीक्षा करेगी।
विज्ञप्ति में कहा गया कि 18 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने और उनकी मांगों पर विचार करने के लिए वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अगले दिन 19 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत शुरू की। शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही और आगे चर्चा का रास्ता खुला।
इसके बाद समिति ने छात्रों से विश्वविद्यालय के नियमित छात्रों की सूची मांगी और प्रतिनिधिमंडल को सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन के कार्यालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया। आमंत्रण पर छात्र प्रतिनिधियों ने 20 अक्टूबर को दो घंटे चली बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें उनकी शिकायतों को सुना गया और उन पर चर्चा की गई।
इसी दिन शाम साढ़े छह बजे छात्र कल्याण डीन (डीएसडब्ल्यू) के कार्यालय में एक और बैठक हुई। इसमें चर्चा के कार्यवृत्त को अंतिम रूप देने और छात्रों के प्रमुख सुझावों को शामिल करने का प्रयास किया गया। कई दौर की बातचीत और दस्तावेज को अंतिम रूप देने की कोशिशों के बावजूद छात्र कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत नहीं हुए।
कुलपति प्रो. मजहर आसिफ की अध्यक्षता और कुलसचिव प्रो. एमडी महताब आलम रिजवी की मौजूदगी में बुधवार को उच्चस्तरीय समिति के सभी सदस्यों तथा विश्वविद्यालय के सभी संकायों के डीन, छात्र कल्याण डीन, परीक्षा नियंत्रक, अकादमिक मामलों के डीन, मुख्य प्रॉक्टर, सभी प्रोवोस्ट, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी और सुरक्षा सलाहकार की बैठक हुई।
बैठक में उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों और छात्रों के साथ हुई बातचीत पर विचार किया गया। साथ ही परिसर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के उपायों पर चर्चा की गई।
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद विश्वविद्यालय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (जेएमआईएसयू) के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित करने की घोषणा की और इसकी अधिसूचना जारी की। यह समिति जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम, 1988 की धारा 23(जे) और 23(के) के तहत गठित की गई है।
जामिया ने कहा कि वह छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और परिसर में शांति एवं सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल, विरासत तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा की रक्षा भी उसकी प्राथमिकता है।
विश्वविद्यालय ने छात्रों के जारी विरोध प्रदर्शन का समाधान संवाद, आपसी विश्वास और रचनात्मक बातचीत के जरिए निकालने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
