कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सीबीएसई ने गत एक जून को कंपनी पर जुर्माना लगाने की बात कही थी लेकिन अब तक न तो कोई दंडात्मक आदेश जारी हुआ है और न ही जुर्माना लगाया गया है। उनका कहना था कि आश्चर्य की बात यह है कि सीबीएसई में अनियमितता का खुलासा होने के पांच माह बीत गये हैं लेकिन दंडात्मक कार्रवाई को लेकर अब तक कुछ नहीं हुआ है।
श्री रमेश ने कहा कि मीडिया की एक प्रमुख रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के खिलाफ अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पहले आई रिपोर्टों में बताया गया था कि ओएसएम की निविदा से काम पूरा करने में विफल रहने वाले विक्रेताओं को काली सूची में डालने संबंधी शर्त हटा दी गई थी। इसके कुछ महीने बाद ही कोएमपीटी को 38 करोड़ रुपये से अधिक का ठेका दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका देने की प्रक्रिया में शामिल शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के अधिकारियों को ही कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपे जाने से हितों के टकराव की आशंका पैदा होती है। श्री रमेश ने कहा कि छात्रों के बड़े आंदोलन के बावजूद शिक्षा मंत्रालय में कुछ नहीं बदला है और नए मंत्री भी पिछली व्यवस्था से विरासत में मिली कंपनियों को बचा रहे हैं। उन्होंने सरकार को ‘वोट चोर, पेपर चोर सरकार’ बताते हुए कहा कि उसे सत्ता से जाना चाहिए।
