श्री सिरसा ने बताया कि नीति आयोग और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप करीब 30 एजेंसियां 11-सूत्रीय प्रदूषण नियंत्रण योजना पर काम कर रही हैं। सरकार वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठा रही है।
उन्होंने वाहन चालकों से वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना दिल्ली में प्रवेश नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है। सभी ईंधन स्टेशनों को ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली की सीमाओं और ईस्टर्न-वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों की निगरानी की जा रही है। सरकार की कार्ययोजना के अनुसार, एक नवंबर 2026 से दिल्ली के बाहर से आने वाले बीएस-6 से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रावधान है, हालांकि निर्धारित श्रेणियों और आवश्यक सेवाओं को नियमानुसार छूट मिलेगी।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि यातायात जाम वाले स्थानों की पहचान कर व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आई-सीसीसी) के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जा रही है और 311 ऐप पर मिलने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए मॉनिटरिंग टीमें बढ़ाई गई हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली के 283 निर्माण स्थलों पर 608 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं, जबकि करीब 200 ऊंची इमारतों पर भी एंटी-स्मॉग गन स्थापित की गई हैं। सड़क की धूल नियंत्रित करने के लिए 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर तैनात किए गए हैं। कार्ययोजना में एक नवंबर से 31 जनवरी तक बाहरी निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर प्रस्तावित रोक, पार्किंग शुल्क में वृद्धि तथा कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए घर से काम करने जैसे उपाय भी शामिल हैं।
श्री सिरसा ने बताया कि दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले 78 लाख पौधे लगाए गए हैं और उनकी उत्तरजीविता दर 96 से 97 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं शून्य दर्ज की गई हैं।
