भोपाल। युवाओं को सही दिशा देने और उन्हें जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराने के लिए युवा सम्मेलनों की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जैन संत आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने भोपाल में आयोजित युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवाओं को आधुनिक प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक उन्नति का संतुलन बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का युवा भौतिक उन्नति और आधुनिक जीवनशैली को ही विकास का आधार मानने लगा है, जबकि वास्तविक विकास नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक उन्नयन से संभव होता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पाप कर्मों से भय करता है, वही धर्म के मार्ग पर सच्चे अर्थों में आगे बढ़ सकता है।
आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने कहा कि धर्म केवल भाषणों और नारों का विषय नहीं है, बल्कि उसे जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाना आवश्यक है। व्यक्ति की कमियों की तुलना चेहरे पर लगी गंदगी से करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दर्पण स्वयं चेहरे की गंदगी साफ नहीं कर सकता, उसी प्रकार व्यक्ति को अपने जीवन के दोष स्वयं के प्रयासों से दूर करने होंगे।
उन्होंने महान पुरुषों, तीर्थंकरों और 63 शलाका पुरुषों के जीवन का अध्ययन करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे संस्कारों और चरित्र का निर्माण होता है। केवल आधुनिक सुविधाएं वास्तविक विकास की गारंटी नहीं दे सकतीं।
उन्होंने चिंता जताई कि ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ का युग अब ‘उच्च जीवन, साधारण विचार’ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। जीवनशैली आधुनिक होती जा रही है, लेकिन मूल्यों और विचारों में गिरावट चिंताजनक है।
आचार्य श्री ने युवाओं से दिखावे से ऊपर उठकर दर्शन और आचरण को जीवन में अपनाने तथा नियमित स्वाध्याय करने का आह्वान किया। उन्होंने बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा के समन्वय पर भी बल दिया। इस अवसर पर पंचायत समिति और संबद्ध समितियों के अनेक सदस्य उपस्थित थे।
