रावण दहन के बाद अब क्या करेंगे कारीगर? 3 महीने की मेहनत के बाद लौटेंगे पुराने काम पर

 

भोपाल:दशहरे के साथ ही रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों का सीजन भी खत्म हो गया है। पिछले तीन से चार महीने तक दिन-रात मेहनत कर रावण के पुतले तैयार करने वाले कारीगर अब अपने पुराने काम पर लौटने की तैयारी में हैं। इनके लिए रावण के पुतले बनाना सालभर का नहीं, बल्कि कुछ महीनों का रोजगार है।

इस काम से जुड़े कुछ लोग पूरे साल अपना दूसरा कारोबार करते हैं, तो कुछ निजी नौकरी करते हैं। दशहरे का सीजन खत्म होने के बाद वे वापस अपनी नौकरी और पुराने व्यवसाय में जुट जाते हैं। वहीं, महिला कारीगर घर संभालने के साथ घरेलू कामों में लौट जाती हैं।

रावण के पुतले बनाने में मेहनत के साथ लागत भी काफी ज्यादा लगती है। कारीगरों को बांस, कागज और अन्य सामग्री जुटाने से लेकर पुतलों को तैयार करने तक कई चरणों में काम करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें कई महीनों तक लगातार मेहनत करनी होती है। कारीगरों के मुताबिक, सीजन के दौरान होने वाली कमाई से उनकी लागत निकल जाती है और मेहनत के हिसाब से मुनाफा भी मिल जाता है।

दशहरा खत्म होने के बाद अब इन कारीगरों के लिए इस काम का इंतजार अगले सीजन तक रहेगा। फिलहाल वे अपने रोजमर्रा के कामों में लौटेंगे, लेकिन अगले साल फिर रावण के पुतले बनाने की तैयारी शुरू होगी।

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