वाशिंगटन, 16अक्टूबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के पूर्व मनोचिकित्सक निदाल हसन को गोली मारकर (फायरिंग स्क्वॉड) दिये जाने वाले मृत्युदंड सजा के सजीव प्रसारण (लाइव-स्ट्रीमिंग) की योजना रद्द कर दी है।
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि वे फोर्ट हुड हमले के दोषी की मौत को दिखाए जाने के पक्ष में हैं, जबकि उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने इस पर संदेह जताया था और कहा था कि वे इसे नहीं देखेंगे।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और दुनिया भर में हुई भारी आलोचना के बाद ट्रंप ने लाइव-स्ट्रीमिंग रद्द करने का फैसला लिया। गुरुवार को उन्होंने कहा कि “कई अच्छे और नेक इरादे वाले लोग शायद उसे मरते हुए नहीं देखना चाहेंगे।”
ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि अगर इस सजा को सबके लिए लाइव-स्ट्रीम किया जाता, तो यह दुनिया के लिए एक कड़ा संदेश होता कि अमेरिका आतंकवादियों और हसन जैसे नीच लोगों से कैसे निपटता है।”
राष्ट्रपति ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी पोस्ट में आगे कहा, “उसे तय कार्यक्रम के अनुसार ‘फायरिंग स्क्वॉड’ के जरिए ही मौत की सजा दी जाएगी, लेकिन इस घटना की लाइव-स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी।”
साल 2009 में टेक्सास के एक सैन्य अड्डे पर हसन ने अमेरिकी सेना के 13 निहत्थे जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी थी और 32 अन्य लोगों को घायल कर दिया था। ‘फायरिंग स्क्वॉड’ के जरिए दी जाने वाली यह सजा, 60 से अधिक वर्षों में सेना द्वारा दी जाने वाली पहली मौत की सजा होगी।
ट्रंप ने कहा कि पीड़ितों के परिवार चाहें तो खुद वहां मौजूद रहकर फांसी (या मृत्युदंड) की प्रक्रिया देख सकते हैं। उन्होंने कहा, “उन्हें न्याय होते देखने का हक है!”
पिछले हफ्ते पेंटागन ने घोषणा की कि वह 3 दिसंबर 2026 को हसन को ‘फायरिंग स्क्वॉड’ के जरिए मौत की सजा देगा और इस घटना की लाइव-स्ट्रीमिंग भी करेगा। इसके बाद मानवाधिकार समूहों और कई अन्य लोगों की ओर से तीखी आलोचना शुरू हो गई। संयुक्त राष्ट्र ने इन योजनाओं को “घिनौना” करार दिया।
पिछले साल 17 देशों में 2,700 से ज्यादा लोगों को मौत की सजा दी गई, लेकिन इनमें से केवल दो देशों ने इसे सबके सामने (सार्वजनिक रूप से) अंजाम दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2025 में ईरान में 11 और अफगानिस्तान में 6 लोगों को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी गई थी।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हसन की फांसी को ऑनलाइन दिखाने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा, “लोगों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के कामों के गंभीर परिणाम होते हैं।”
लेकिन जैसे-जैसे आलोचना बढ़ी, ट्रंप अपने समर्थन से थोड़ा पीछे हटते दिखे। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि वे लाइव-स्ट्रीमिंग की योजना का “पूरी तरह” समर्थन करते हैं, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि पेंटागन अभी भी इस पर “फैसला ले रहा है”। राष्ट्रपति ने हसन को “पूरी तरह से पागल” भी बताया।
उन्होंने कहा, “मुझे सच में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कैसे जाता है, बस उसे चले जाना चाहिए। मुझे लगता है कि उसके लिए मौत की सजा एक बिल्कुल सही अंत है।”
ट्रंप द्वारा इसे रद्द करने की घोषणा के बाद पेंटागन के एक प्रवक्ता ने बताया कि हेगसेथ ने पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति से इस बारे में बात कर ली थी।
प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा, “सेक्रेटरी राष्ट्रपति के फैसले का समर्थन करते हैं, और दोनों की राय पूरी तरह से एक जैसी है।”
मुख्य रूप से दिवानी मामलों पर काम करने वाले हसन के वकील जॉन गैलिगन ने बीबीसी को बताया कि फांसी की ‘लाइवस्ट्रीमिंग’ रद्द करने का ट्रंप का फैसला “कोई हैरानी की बात नहीं है”।
गैलिगन ने कहा, “किसी फांसी को ‘लाइवस्ट्रीम’ करने का हेगसेथ का फैसला और बयान शुरू से ही एक बेवकूफी भरा कदम था और यह सेना के अपने नियमों का भी उल्लंघन था।”
उन्होंने बताया कि हसन छाती के नीचे से लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) है। जब ट्रंप ने लाइवस्ट्रीमिंग की योजना को मंजूरी दी थी, तब उन्हें “शायद इस बात की जानकारी भी नहीं थी”।
गैलिगन ने कहा, “नुकसान तो हो ही चुका है – अब सेना बस इस गड़बड़ी को ठीक करने की कोशिश कर रही है। यह हमारी सैन्य न्याय प्रणाली पर हमेशा के लिए एक दाग बनकर रह जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यह साफ नहीं है कि हसन को ट्रंप के इस फैसले (लाइवस्ट्रीमिंग को रद्द करने) के बारे में पता चला है या नहीं।
हसन ने एक भीड़-भाड़ वाली मेडिकल बिल्डिंग में गोलीबारी की थी, जहाँ तैनात होने जा रहे सैनिक अपने चेक-अप और वैक्सीन का इंतजार कर रहे थे।
बाद में उसने अदालत में स्वीकार किया कि वही हमलावर था और उसने “अपनी गलतियों” के लिए माफी मांगी।
वर्ष 2013 में अपने कोर्ट मार्शल के दौरान उसने कहा था कि उसका मानना था कि वह अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना से मुसलमानों और तालिबान की रक्षा कर रहा था।
पांच नवंबर 2009 को हुई हत्याएं, अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुआ अब तक का सबसे घातक गैर-युद्ध हमला थीं।
अमेरिकी सैन्य कानून के अनुसार, किसी सैन्य फांसी (मृत्युदंड) के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है।
इसमें ‘अपीलीय समीक्षा’ की भी आवश्यकता होती है, जिसमें एक उच्च अदालत फैसले की जांच करती है और आगे बढ़ने की कानूनी वैधता पर अपना अंतिम निर्णय देती है।
