बागली: नवरात्रि पर्व के दौरान छठवे दिवस पर मां कात्यानी देवी की पूजा होगी बागली मुख्यालय के समीप 70 वर्ष पुराना प्राचीन कात्यानी देवी मंदिर बना हुआ है। हालांकि इसका नवीन स्वरूप 2001 में बनकर तैयार हुआ इसके पूर्व इस स्थान पर माता जी की बेदी बनी हुई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान पर मां कात्यायनी देवी के भजन और उनकी प्रतीक पूजा पाठ की जाती थी। 2001 में सभी की सहमति बनी और सहयोग के चलते जटाशंकर महंत ब्रह्मलीन बाबा केशव दास जी की प्रेरणा से इस स्थान पर मां कात्यानी देवी की प्रतिमा स्थापित करने के साथ-साथ मंदिर का निर्माण किया गया तभी से इस स्थान पर क्षेत्र नवरात्रि एवं कुवांर महीने की नवरात्रि पर उत्सव मनाया जाता है। 9 दिन तक यज्ञ हवन और सुबह-शाम आरती पूजा होती है, इस दौरान माताजी के आशीर्वाद से मान मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु मिठाई फल फ्रूट गुड मूंम फली और अन्य खाद्य सामग्री से तुला दान करते हैं। और प्रसाद के रूप में उसे बाटते हैं।
वर्तमान पुजारी अंतिम उपाध्याय ने बताया कि उनकी चौथी पीढ़ी इस स्थान पर पूजा कार्य कर रही है। और रही बात तुलादान की तो लोग दूर-दूर से यहां पर माता के सामने समस्या लेकर आते हैं, पूरी होने पर तुलादान करते हैं। इस वर्ष ग्राम बेहरी में सभी की सहमति से 10 सदस्यों की समिति भी बना दी गई है जो पूरे कार्य की देखरेख और हिसाब किताब रखेगी समिति सदस्य केदार पाटीदार ने बताया कि 9 दिन नवरात्रि के पूर्ण होने के बाद दशहरे के दूसरे दिन से 5 दिन के लिए फिर से गरबी महोत्सव जो माता जी को समर्पित रहता है। वह धूमधाम से मनाया जाता है ।
आखिरी दिन केलिया पूर्णिमा पर दूध से बनी मिठाई और अन्य सामग्री का भोग लगाया जाता है। मान्यता अनुसार पांच दिनों तक मान करने वाले परिवार घर में उत्पादन दूध का उपयोग नहीं करते इसकी बजाय उसका दही जमा कर मक्खन बना लेते हैं और उससे उत्पन्न घी के चार हिस्से करते हैं। एक हिस्सा नदी में विसर्जित करते हैं दूसरा हिस्सा प्रजापत परिवार को दिया जाता है। जो आखिरी दिन पूर्णिमा अवसर पर मिट्टी की बनी मटकी और अन्य सामग्री देता है ,तीसरा हिस्सा माता की ज्योत में लिया जाता है चौथा हिस्सा बहन बेटी को दिया जाता है इस दौरान परिवार स्वयं के यहां उत्पादन किए हुए दूध का उपयोग नहीं करता है और ना ही उसे बेचता है इसी प्रकार 50% से अधिक परिवार इस नियम का पालन करते हैं जिन लोगों के यहां इस प्रकार की मान नहीं रहती उनसे यह परिवार दूध खरीदने हैं और अपने उपयोग में लेते हैं यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है। साथ ही बताया कि इस प्रकार के मंदिर भारत में सिर्फ तीन स्थानों पर है। ग्वालियर नागपुर एवं बेहरी में कात्यानी देवी के एका की मंदिर है। साथ में श्रद्धालुओं ने बताया कि 9 यजमान जोड़े प्रतिदिन अलग-अलग रूप में जज मानी करते हैं और पूजा करते हैं प्रतिदिन 300से400आरती में शामिल होते हैं।
