बीना: जमीन के ठेके के विवाद को लेकर हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार कुण्डु की कोर्ट ने थाना बीना के प्रकरण क्र.10/2023, अपराध क्र. 795/2022 में 6 आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।दोषी पाए गए आरोपियों में सुकई अहिरवार पिता हीरा अहिरवार, अनिल पटेल पिता संतराम पटेल, अमना उर्फ अरविन्द अहिरवार पिता रामसिंह, राहुल पिता रामसिंह, प्रमेन्द्र पिता दशरथ सिंह एवं किशन पटेल पिता कन्छेदी लाल निवासी ग्राम ढिकुआ शामिल हैं।कोर्ट ने सभी को धारा 302/149 में आजीवन कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये अर्थदण्ड,धारा 325/149 में तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं दो-दो हजार रुपये अर्थदण्ड,धारा 323/149 में एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक-एक हजार रुपये अर्थदण्ड से दंडित किया है।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी अमित गोयल सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी / अपर लोक अभियोजक द्वारा की गई।क्या था पूरा मामला फरियादी गजराज ने 08.11.2022 को सिविल अस्पताल बीना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह ग्राम हडकारी में रहता है और मजदूरी करता है। उसने बीना के कल्लू साहू से करीब 15 वर्ष से ठेके पर जमीन ले रखी थी। यही जमीन सुकई अहिरवार को ठेके पर नहीं मिली, इसी बात को लेकर रंजिश चल रही थी।07.11.2022 की रात करीब 11:30 बजे सुकई अहिरवार और उसके भाई के दोनों लड़के अमना और राहुल उसके घर आए और गालियां देने लगे। उनके पास कुल्हाड़ी एवं डंडा था। इसके बाद किशन पटेल और अनिल पटेल भी आए और धमकी देकर गए कि उसकी पत्नी को मार डालेंगे।
उस समय उसकी पत्नी शांतिबाई, बहू सुमन और बेटा नंदलाल खेत पर गए थे। बेटे ने फोन पर बताया कि वह कमरे में बंद है और खेत में सुकई, अमना, राहुल, किशन और अनिल ने मां शांतिबाई और पत्नी सुमन के साथ कुल्हाड़ी और डंडे से मारपीट की है। सुकई, अमना और राहुल ने शांतिबाई के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया, जिससे गंभीर चोट आई। वहीं किशन और अनिल ने सुमन के साथ डंडे से मारपीट की।सूचना पर फरियादी ट्रैक्टर लेकर मौके पर पहुंचा और घायलों को 100 नंबर गाड़ी से सरकारी अस्पताल बीना ले गया, जहां डॉक्टरों ने शांतिबाई को मृत घोषित कर दिया।विवेचना के बाद अभियोग पत्र कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर आरोपियों को सजा सुनाई।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए म.प्र. शासन की गाइडलाइन अनुसार इसे जघन्य एवं सनसनीखेज के रूप में चिन्हित किया गया था, जिसकी जिला दंडाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उपसंचालक (अभियोजन), सहायक निदेशक (अभियोजन) द्वारा सतत मॉनिटरिंग की गई।
