जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने जेलों में बंद आरोपियों को गुमराह कर वकालतनामा हासिल करने की कथित गड़बडिय़ों पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि प्रदेश की सभी जेलों में हर दो से चार महीने के अंतराल पर नियमित कानूनी सहायता शिविर लगाए जाएं। इससे ऐसे बंदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी, जिससे वकील नियुक्त करने में असमर्थ या उसका खर्च नहीं उठा सकते। साथ ही, तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर अथवा छलपूर्वक वकालतनामा हासिल करने की आशंका पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
यह मामला आपराधिक अपील अरविंद कुमार एवं अन्य विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन व अन्य से संबंधित है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस रामकुमार चौबे की युगलपीठ ने ताजा आदेश में पूर्व में सात अप्रैल 10 अगस्त और एक सितंबर 2026 को पारित आदेशों का हवाला देते हुए वकीलों, जेल अधिकारियों और बिचौलियों के कथित गठजोड़ के माध्यम से हुई गड़बडिय़ों का उल्लेख किया। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि पूर्व निर्देशों के पालन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है और उसमें कुछ उपाय सुझाए गए हैं। वहीं, राज्य अधिवक्ता परिषद की ओर से उपस्थित अधिवक्ता रमाकांत अवस्थी ने बताया कि परिषद के नए निकाय के गठन की अधिसूचना प्रकाशित हो चुकी है और निकाय शीघ्र काम शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व निर्देशों के अनुरूप दोषी सदस्यों के विरुद्ध उचित कदम उठाए जाएंगे।
