डा. मुरुगन ने मंगलवार को लिखा यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा करते हुए लिखा है कि वह मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा,” वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मिले अवसरों के लिए आभारी हैं। अब वह अपना पूरा समय तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करने, पार्टी का विस्तार करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगाना चाहते हैं। ”
उन्होंने चुनाव में तमिलनाडु से भाजपा के लिए बड़ी संख्या में सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ काम करने की इच्छा भी जताई।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि हाल में तमिलनाडु के दौरे के दौरान उन्होंने लोगों में श्री मोदी के प्रति उत्साह और उम्मीद देखी। इससे उन्हें राज्य में पार्टी के लिए और अधिक काम करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि वह हर गांव और गली में जाकर लोगों से मिलना, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना और राज्य के हर हिस्से में पार्टी की मौजूदगी बढ़ाना चाहते हैं।
डा. मुरुगन ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते, बल्कि एक बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे और मवेशी चराते थे। वे आज भी कोनूर गांव में सादा जीवन जीते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा एक दिन केंद्र सरकार में मंत्री बनेगा।
उन्होंने लिखा है कि महाकवि भारती, सरदार पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने कॉलेज के दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर काम शुरू किया। करीब 30 साल तक एबीवीपी और भाजपा में काम करते हुए उनका सिद्धांत रहा है-‘राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और स्वयं सबसे आखिर में।’
केन्द्रीय मंत्री ने पत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बीते पांच वर्षों के दौरान केंद्र सरकार में काम करने के अवसर के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में काम करने, दो बार राज्यसभा का सदस्य बनने और केंद्र में मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने का अवसर उनके लिए सम्मान की बात रहा है।
उन्होंने तमिलनाडु में चेन्नई मेट्रो, तूतीकोरिन बंदरगाह, राजमार्गों के विस्तार और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का भी उल्लेख किया। साथ ही मछुआरों के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों और आईआईटी मद्रास से जुड़े नई तकनीक के प्रयासों में प्रधानमंत्री की रुचि का जिक्र किया।