भोपाल: नवरात्रि के दौरान शहर की छोटी कॉलोनियों और बस्तियों में भी मां दुर्गा के पंडाल सजाए जाते हैं। इन पंडालों की खासियत यह है कि स्थानीय लोग मिलकर चंदा जुटाते हैं और सामूहिक भागीदारी से पूरे आयोजन की व्यवस्था करते हैं। हालांकि, इस बार छोटे दुर्गा पंडालों के बजट पर भी महंगाई का असर देखने को मिल रहा है।
दुर्गा उत्सव समितियों के मुताबिक, छोटे पंडालों को तैयार करने में ढाई से तीन लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक खर्च हो रहा है। पंडाल की सजावट और आयोजन की अन्य व्यवस्थाओं के लिए समितियों के सदस्य आपस में सहयोग करते हैं और स्थानीय लोगों से चंदा जुटाते हैं।
सीमित बजट में आयोजन को बेहतर बनाने के लिए समिति के सदस्य मिलकर जिम्मेदारियां संभालते हैं। महंगाई के बीच खर्च का प्रबंधन करना समितियों के लिए चुनौती है, लेकिन स्थानीय लोगों का सहयोग और सामुदायिक भागीदारी दुर्गा उत्सव की परंपरा को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
