अमेरिका में 60 साल बाद होगी फायरिंग स्क्वाड से मौत की सजा, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रक्रिया लाइवस्ट्रीम करने का किया ऐलान

वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका में दशकों बाद एक बेहद दुर्लभ और सख्त कदम उठाया जा रहा है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की है कि साल 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड मिलिट्री बेस पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 13 लोगों की जान लेने वाले पूर्व सैनिक निदाल हसन को इसी साल 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा दी जाएगी। यह अमेरिका में पिछले 60 वर्षों से अधिक समय में पहली बार होगी जब किसी सैन्य अपराधी को इस तरह से मृत्युदंड दिया जाएगा। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पूरी खौफनाक सजा की प्रक्रिया को लाइवस्ट्रीम किया जाएगा ताकि जनता यह समझ सके कि देश में इस तरह के जघन्य अपराधों के कितने गंभीर और भयानक परिणाम होते हैं।

वर्ष 2009 के सैन्य बेस नरसंहार में हुई थी 13 लोगों की मौत, कानूनी लड़ाइयों और अपील के बाद सजा पर लगी मुहर

यह पूरा मामला 5 नवंबर 2009 का है, जब अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर और मनोचिकित्सक निदाल हसन ने टेक्सास स्थित फोर्ट हूड बेस पर एक मेडिकल प्रोसेसिंग सेंटर के अंदर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस भीषण आतंकी हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वर्ष 2013 में एक सैन्य जूरी ने उसे मौत की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वह कैंसस के फोर्ट लीवनवर्थ में कैद था। पिछले साल उसकी सारी कानूनी अपीलें पूरी हो जाने के बाद, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सिफारिश पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते इस ऐतिहासिक मौत की सजा को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है।

फायरिंग स्क्वाड से मौत की सजा पर अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया, ओबामा के कार्यकाल के दौरान की बहस भी आई सामने

इस फैसले के साथ ही अमेरिका में मिलिट्री फायरिंग स्क्वाड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिका में आखिरी बार नवंबर 1945 में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि ओबामा प्रशासन के दौरान इस घटना को शुरू में ‘वर्कप्लेस वायलेंस’ (कार्यस्थल की हिंसा) करार दिया गया था, जबकि यह वर्दी में छिपा एक कट्टरपंथी हमला था। वर्तमान में अमेरिका के पांच राज्य (इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा) फायरिंग स्क्वाड की अनुमति देते हैं। वहीं, दुनिया भर में चीन, उत्तर प्रदेश, सऊदी अरब और उत्तर कोरिया जैसे देशों में आज भी इस तरह की सजा का प्रावधान है।

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