नयी दिल्ली, 9 अक्टूबर (वार्ता) भारत और माली ने इस साल विश्व कपास दिवस पर न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर एक संयुक्त कार्यकम आयोजित किया जिसका उद्येश्य विभिन्न विकासशील और गरीब देशों के आर्थिक विकास और रोजगार में कपास के महत्व को रेखांकित करना था।
इस कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र में दोनों देशों के स्थायी राजनयिक कार्यालयों ने सात अक्टूबर को विश्व कपास दिवस पर आयोजित किया था।
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इस अवसर पर “कपास स्वस्थ विकास के लिए : आजीविका, मूल्य वर्धन एवं भागीदारी” विषय पर कार्यक्रम में कपास के महत्व पर चर्चा की गयी।
कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने महात्मा गांधी द्वारा कपास और चरखे को आत्मनिर्भरता, गरिमा तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जोड़े जाने के समय का स्मरण किया। उन्होंने भारत जैसे देश में कपास क्षेत्र की चार प्राथमिकताओं को रेखांकित किया जिनमें उत्पादकों की आजीविका को समर्थन , मूल्य संवर्धन, नये बाजारों तक विस्तार, सततता को बढ़ावा तथा प्रौद्योगिकी और साझेदारियों को सुदृढ़ करना शामिल है।
उन्होंने किफायती इनपुट और वित्त की उपलब्धता, छोटे उद्यमों को सहायता तथा दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे कपास उत्पादक देश अधिक मूल्य बनाए रख सकें और सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ा सकें।
माली के स्थायी प्रतिनिधि इस्सा कोनफूरू ने माली की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका के लिए कपास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रसंस्करण क्षमता की कमी, कच्चे माल की लागत, बाजार तक पहुंच और व्यापार को बिगाड़ने वाली सब्सिडी से उत्पन्न चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
घरेलू प्रसंस्करण का विस्तार करने और रोजगार सृजित करने के लिए माली के प्रयासों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने दक्षिण-दक्षिण सहयोग सहित पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारियों का स्वागत किया और भारत को एक प्रमुख साझेदार के रूप में स्वीकार किया।
सांसद असित कुमार मल ने पश्चिम बंगाल के बोलपुर में कांथा कढ़ाई के अनुभव का उल्लेख करते हुए कारीगरों के लिए उचित पारिश्रमिक, किफायती ऋण, डिजाइन संबंधी सहायता और बाजार तक पहुंच के महत्व पर जोर दिया।
सांसद एल. के. सुधीश ने सूती निटवियर और परिधान विनिर्माण के क्षेत्र में तमिलनाडु के अनुभव को रेखांकित किया, जिसमें छोटे उद्यमों, साझा अवसंरचना और कुशल श्रमिकों के योगदान का उल्लेख किया गया। उन्होंने पीएम मित्र पहल के तहत विकसित किए जा रहे एकीकृत वस्त्र पार्क तथा वस्त्र प्रसंस्करण में अपशिष्ट जल के पुनर्प्राप्ति और पुनः उपयोग का भी उल्लेख किया।
कपड़ा मंत्रालय की संयुक्त सचिव पद्मिनी सिंगला ने कपास के एक प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता के रूप में भारत की भूमिका तथा छोटे और सीमांत किसानों के लिए इस क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में आइवरी कोस्ट, उज्बेकिस्तान, चाड, नीदरलैंड, बुर्किना फासो, मिस्र , कैमरून और पेरू के प्रतिनिधियों, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में खाद्य और कृषि संगठन के संपर्क कार्यालय की निदेशक एंजेलिका जाकोम, और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. केशव आर. क्रांति ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
चर्चा में कपास मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, छोटे किसानों और कारीगरों को सहायता देने, प्रसंस्करण क्षमता और बाजार तक पहुंच में सुधार करने, इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और उन्नत विज्ञान के उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को और प्रगाढ़ करने के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रतिभागियों ने भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं की एक प्रदर्शनी के तौर पर एक कुशल शिल्पकार के मार्गदर्शन में सूती वस्त्र पर पेन कलमकारी की विधा को देखा।
विश्व कपास दिवस विशेष रूप से विकासशील और अल्पविकसित देशों में आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और गरीबी उन्मूलन में कपास की भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए मनाया जाता है ।

