इंजेक्शन के बाद नाबालिग की मौत, परिजनों का हंगामा

नीमच/मनासा। मनासा थाना क्षेत्र के ग्राम भाटखेड़ी बुजुर्ग निवासी नाबालिग धर्मपाल पिता मंगल कीर की उपचार के दौरान मौत के बाद गुरुवार को मामला गरमा गया। परिजनों और ग्रामीणों ने बच्चे की मौत के विरोध में मनासा थाने का घेराव कर चक्काजाम किया। परिजन निजी अस्पताल के चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। घटनाक्रम के बाद प्रशासन की टीम ने संबंधित निजी अस्पताल को सील कर दिया। वहीं पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और नीमच जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए।

जानकारी के अनुसार धर्मपाल को बुधवार शाम सर्दी-खांसी एवं बुखार की शिकायत होने पर परिजन मनासा के रानी लक्ष्मीबाई मार्ग स्थित निजी अस्पताल में उपचार के लिए लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और मुंह से झाग आने लगा। कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद भडक़ा आक्रोश, थाने का घेराव

बच्चे की मौत की जानकारी मिलते ही परिजन और भाटखेड़ी के ग्रामीण आक्रोशित हो गए। गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में लोग मनासा पहुंचे और पुराने शासकीय अस्पताल के सामने सडक़ पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। इसके बाद आक्रोशित लोगों ने मनासा थाने का घेराव करते हुए संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए मार्ग पर आवागमन भी प्रभावित हुआ।

मौके पर पहुंचे प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए नीमच जिला अस्पताल लाया गया।

अस्पताल सील, टीम गठित कर जांच शुरू

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने टीम गठित कर संबंधित निजी अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की। मनासा एसडीएम मयूरी जौक ने बताया कि घटना के बाद टीम गठित कर अस्पताल सील किया गया है। साथ ही मामले में विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

बालक के शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल द्वारा कराया गया, ताकि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शव लेने से इनकार, 50 लाख मुआवजे की मांग

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए। मृतक के पिता मंगल तथा जिला पंचायत सदस्य आर. सागर कच्छावा सहित परिजनों ने संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीडि़त परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने की मांग की।

परिजनों का कहना है कि बच्चा सामान्य बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचा था, लेकिन इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इसी आधार पर वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी मौत की वजह

फिलहाल बालक की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। परिजनों द्वारा लगाए गए इंजेक्शन के बाद तबीयत बिगडऩे के आरोपों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय जांच और अन्य तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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