
सिंगरौली। बैढ़न-बरगवां मार्ग के तेलदह-गड़ेरिया में पिछले करीब 10 वर्षों से संचालित व्यावसायिक टोल प्लाजा अब गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि व्यावसायिक वाहनों से शुल्क वसूली करने वाले इस टोल प्लाजा के आसपास आज तक एक भी वेब्रिज अथवा धर्मकांटा स्थापित नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोजाना गुजरने वाले सैकड़ों मालवाहकों के भार की जांच आखिर किस आधार पर की जाती है। इस मार्ग से राखड़, कोयला, रेत, गिट्टी सहित अन्य खनिज और निर्माण सामग्री से लदे भारी वाहनों का लगातार आवागमन होता है। यदि वाहनों का वजन निर्धारित मानकों के अनुरूप जांचा ही नहीं जा रहा, तो ओवरलोडिंग पर कार्रवाई और शासन को मिलने वाले राजस्व की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है। टोल की अनुमति, अनुबंध, शुल्क वसूली, वाहन संख्या, ओवरलोडिंग की जांच, राजस्व अभिलेख और पिछले दस वर्षों की पूरी कार्यप्रणाली की जांच हो तो कथित गोलमाल की परतें खुल सकती हैं। सवाल यह है कि शासन करोड़ों के राजस्व से जुड़े इस मामले में कब तक चुप्पी साधे रहेगा ?
दस साल से टोल, उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामले में एमपीआरडीसी के अधिकारियों से जवाब मांगे जाने पर स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोलमाल जवाब दिए जाने से संदेह और गहरा गया है। आरोप यह भी है कि टोल ठेकेदार को नियमों की अनदेखी के बावजूद वर्षों से खुली छूट मिलती रही, जबकि इसका सीधा असर प्रदेश सरकार के राजस्व पर पड़ा। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि दस वर्षों से टोल संचालित है और आसपास वजन जांचने की कोई व्यवस्था नहीं है, तो अब तक करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व का आंकलन किसने किया? क्या विभाग ने कभी इसकी गंभीरता से जांच कराई? यदि नहीं तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। विपक्षी दलों ने मामले को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि एमपीआरडीसी के कुछ अधिकारियों के लिए टोल व्यवस्था खाने-कमाने का जरिया बन गई है।
खाने-कमाने का है जरिया
एक दशक से टोल पर धर्मकांटा नही है। कहीं इसमें सरकार एवं एमपीआरडीसी की संलिप्तता है। निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह टोल प्लाजा खाने-पीने के लिए सहारा है। इसमें व्यापक पैमाने पर अनियमितता हुई है।
राजेश सोनी
प्रदेश सचिव,आप
भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार
भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। यह एक नमूना है। एमपीआरडीसी के अधिकारियों की संलिप्त होने का है पूरा अंदेशा है। ओवरलोड मालवाहको की जांच कर कैसे पेनाल्टी लगाते होंगे, अपने आप में ही बड़ा सवाल है।
सूर्या द्विवेदी
पूर्व यूथ जिलाध्यक्ष, सिंगरौली
