कांग्रेस की लंच डिप्लोमेसी में भविष्य की रणनीति पर मुहर 

नई दिल्ली, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंडिया गठबंधन के सांसदों के साथ दोपहर का भोजन करते हुए भविष्य की रणनीति बनाई.चुनाव आयोग कार्यालय से लगभग तीन सौ मीटर दूर दिल्ली के जनपथ स्थित प्रसिद्ध सागर रत्न रेस्टोरेंट में खड़गे की मेजबानी में आयोजित हुआ दोपहर भोज जिसे लंच डिप्लोमेसी कहा जा रहा है. इस रणनीतिक भोज में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत लगभग बीस दलों के सांसदों व प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया. बताया जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच भविष्य की साझा राजनीतिक और रणनीतिक रूपरेखा तैयार करना है. सूत्रों की मानें तो लंच के दौरान सभी विपक्षी सांसदों ने एक साझा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके जरिए वे मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात का औपचारिक समय मांगेंगे और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़ी चिंताओं को सीधे आयोग के समक्ष रखने की योजना बनाई गई है. यह भी रणनीति बनाई गई है कि यदि चुनाव आयोग की ओर से मुलाकात का समय तय होता है और सभी दलों से एक-एक प्रतिनिधि को मिलने के लिए बुलाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में सभी विपक्षी सांसदों को एक साथ बैठक में बुलाने के लिए पुनः पत्र लिखकर दबाव बनाया जाएगा. यदि इस मांग को नहीं माना गया तब पार्टी फिर चुनाव आयोग मुख्यालय निर्वाचन सदन तक संयुक्त विरोध मार्च निकालने की घोषणा करेगी. इसके साथ ही विपक्षी नेताओं ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलने का समय मांगने के लिए भी पत्र तैयार किया है. इस पत्र पर भी लंच में मौजूद सभी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग से मिलने के लिए जो पत्र तैयार किया गया है उसमें तत्काल समय देने की मांग की गई है. ऐसे में दबाव बनाने की रणनीति के तहत इंडिया गठबंधन के नेता 9 या 12 अक्टूबर को एक बार फिर बड़ा मार्च और विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं.सूत्रों की मानें तो लंच टेबल पर कांग्रेस, टीएमसी समेत ज्यादातर दलों के नेताओं के बीच संसद के आगामी सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का औपचारिक प्रस्ताव लाने के कानूनी ड्राफ्ट पर भी अंतिम सहमति बनाई गई .

हालांकि सपा ने इस लंच में हिस्सा नहीं लिया. सपा सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की तरफ से इस लंच बैठक को लेकर समय रहते कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी. क्योंकि लंच पूर्व निर्धारित नहीं था ऐसे में मंगलवार को चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च खत्म होने के बाद सपा के अधिकतर सांसद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए रवाना हो गए थे. इस संबंध में कुछ लोग अनौपचारिक बातचीत में कह रहे हैं कि मंगलवार के आंदोलन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ मौजूद थे लेकिन राहुल गांधी व प्रियंका गांधी विरोध मार्च की रणनीति से अलग आकाशवाणी भवन परिसर में अकेले धरना पर बैठ गए और वहां सहयोगियों को नहीं बुलाया. इसके कारण सपा को असहजता हुई है.

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