ब्लैकबोर्ड के पीछे का अनदेखा तनाव, गैर शिक्षण कार्यों में पिस रहे 37 फीसदी शिक्षक

साक्षी केसरवानी भोपाल। गणित, विज्ञान सहित अन्य विषयों पर विद्यार्थियों को सीख देने वाले शिक्षक तनाव की गिरफ्त में आ रहे हैं. एनसीईआरटी के मनोदर्पण सेल द्वारा जारी लेटेस्ट रिपोर्ट टीचर्स मेंटल वेल बीइंग सर्वे के अनुसार 37 प्रतिशत शिक्षक अपने मानसिक स्वास्थ्य में गैर शैक्षणिक जिम्मेदारियां जैसे प्रशासनिक कार्य, डेटा एंट्री, और अन्य गतिविधियां को सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं। वहीं 35 प्रतिशत शिक्षकों ने विद्यार्थियों के उच्च प्रदर्शन की जवाबदेही तय करने को तनाव का कारण बताया। 33 प्रतिशत शिक्षकों ने कार्य में अभिभावकों का सहयोग न मिलना एक बड़ी समस्या बताया। जबकि 29 प्रतिशत शिक्षक कम समय में पाठ्यक्रम पूरा करने के दबाव से परेशान हैं। वहीं 26 प्रतिशत शिक्षक अत्यधिक कार्यभार और 25 प्रतिशत शिक्षक सख्त समय सीमा (रिजिड डेडलाइंस) के कारण तनाव महसूस करते हैं। साथ ही 22 प्रतिशत शिक्षक छात्रों की शारीरिक व मनोवैज्ञानिक सुरक्षा की जिम्मेदारी से चिंतित रहते हैं। जबकि 18 प्रतिशत शिक्षकों का कहना है कि पढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे की कमी सबसे बड़ी बाधा है, जो कई बार तनाव का कारण बनती है। बता दें यह सर्वे देश भर के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 71 हजार 635 शिक्षकों पर किया गया। जिसमें मप्र के 4 हजार 383 शिक्षकों ने भाग लिया। वहीं देश भर से सर्वे में शामिल होने वाले शिक्षकों में 69 प्रतिशत महिला शिक्षक व 30.9 प्रतिशत पुरुष शिक्षक सहित.05 प्रतिशत अन्य श्रेणी के शिक्षक शामिल रहे. बता दें सर्वे में कई शिक्षकों ने एक साथ कई कारणों को अपनी परेशानी की वजह बताया है।

–44 प्रतिशत पुरुष और 34 प्रतिशत महिला शिक्षकों पर बोझ

रिपोर्ट में किए गये दावे के तहत 44 प्रतिशत पुरुष शिक्षकों ने गैर शैक्षणिक जिम्मेदारियों को सबसे बड़ी चुनौती बताया। जबकि महिला शिक्षकों में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत रहा। हालांकि विद्यार्थियों के बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने का दबाव पुरुष पर 38 फीसदी और महिला शिक्षक पर 34 फीसदी बताया गया है।

–थकावट और बर्नआउट से परेशान शिक्षक

सर्वे में 79 प्रतिशत महिला और 80 प्रतिशत पुरुष शिक्षकों ने सामान्य रूप से अपने पेशे को सीधा तनावपूर्ण मानने से असहमति जताई है। लेकिन काम के कारण होने वाली मानसिक थकावट के आंकड़ों में 4 प्रतिशत शिक्षक रोजाना शारीरिक और मानसिक थकावट महसूस करते हैं। 7 प्रतिशत शिक्षक सप्ताह में 3 से 4 बार इस बर्नआउट का सामना करते हैं। 14 प्रतिशत शिक्षक सप्ताह में कम से कम एक बार अत्यधिक मानसिक थकान महसूस करते हैं। वहीं 20 प्रतिशत शिक्षक महीने में एक बार और 25 प्रतिशत शिक्षक 6 महीने में 3 से 4 बार इस स्थिति से गुजरते हैं।

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