
नयी दिल्ली, 5 अक्टूबर (वार्ता) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने संप्रभु प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म पर कैमरा-केंद्रित एआई विज़न सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) विकसित करने के लिए बेंगलुरु स्थित मेसर्स बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स को 130 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का करार किया है। यह सहायता अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष के तहत दी जाएगा। कैमरा-केंद्रित एआई विज़न सिस्टम-ऑन-चिप विकसित करने के लिए
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की आरे से सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार वीरएआई परियोजना की कुल लागत 260 करोड़ रुपये है। यह सहायता वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण (ओसीडी) के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह परियोजना निगरानी अनुप्रयोगों, विशेष रूप से सीसीटीवी प्रणालियों के लिए एक सुरक्षित एआई चिप के विकास पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य देश के बाहर विकसित सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता को कम करना है। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म को एआई प्रोसेसिंग और स्मार्ट सुविधाओं को सुरक्षा, गोपनीयता और कनेक्टिविटी क्षमताओं के साथ संयोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस तकनीक को शुरू में भारत और विकासशील देशों (वैश्विक दक्षिण) में सीसीटीवी और निगरानी अनुप्रयोगों के लिए विकसित किया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म को रक्षा, ऑटोमोटिव, औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्रों में भी उपयोग करने की परिकल्पना की गई है, जिससे स्वदेशी एआई-सक्षम सेमीकंडक्टर समाधानों के लिए एक व्यापक बाजार का निर्माण होगा। आरडीआई के सहयोग से, बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स प्रौद्योगिकी के विकास के काम को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी आगे के प्रौद्योगिकी विकास, सत्यापन, एकीकरण, परीक्षण और स्केल-अप का काम करेगी।
टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “सेमीकंडक्टर लगभग हर उभरती तकनीक की बुनियाद हैं, और विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए एआई चिप्स में स्वदेशी क्षमताएं विकसित करना देश के प्रौद्योगिकी परितंत्र को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स को दी गई वित्तीय मदद टीडीबी के इस लक्ष्य को दर्शाता है कि भारतीय कंपनियों को रणनीतिक सेमीकंडक्टर क्षमताएं विकसित करने और घरेलू डिजाइन विशेषज्ञता को उपयोगी उत्पादों में बदलने में सक्षम बनाया जाए।”
बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के प्रवर्तकों ने कहा, “टीडीबी से मिलने वाली आरडीआई सहायता हमें प्रोजेक्ट वीरएआई के विकास और सत्यापन में तेजी लाने और हमारे एआई विजन एसओसी को व्यावसायिक रूप से तैयार करने में सक्षम बनाएगा।”
