
नीमच। जिला अस्पताल नीमच में चिकित्सकों की तत्परता और समय पर मिले उपचार से 60 वर्षीय बुजुर्ग की जान बच गई। आदित्य स्टेट निवासी महेश कुमार गहलोत को शनिवार सुबह अचानक ब्रेन स्ट्रोक आया। शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी, आवाज लडख़ड़ाने और हाथ-पैर में हरकत बंद होने जैसे लक्षण दिखाई देने पर परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए जांच और उपचार शुरू किया। करीब एक घंटे में उनकी हालत में 90 प्रतिशत से अधिक सुधार हो गया।
परिजनों के अनुसार महेश कुमार को सुबह करीब 9 बजे अचानक शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी महसूस हुई। उनकी आवाज भी लडख़ड़ाने लगी और हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने सुबह 9.17 बजे सीटी स्कैन कराया और स्थिति स्पष्ट होने के बाद 9.30 बजे टेनेक्टीप्लेस इंजेक्शन दिया। करीब 50 हजार रुपए कीमत का यह इंजेक्शन उन्हें अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध कराया गया।
उपचार शुरू होने के करीब एक घंटे बाद ही महेश कुमार के हाथ-पैर में फिर से हरकत शुरू हो गई और उनकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा। चिकित्सकों ने निगरानी में रखते हुए उपचार जारी रखा। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद रविवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
ब्रेन स्ट्रोक में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण
एमडी मेडिसिन डॉ. सतीश चौधरी ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। मरीज को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाया जाता है, उपचार से सुधार की संभावना उतनी ही बेहतर रहती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी, चेहरे के एक हिस्से में टेढ़ापन या हाथ-पैर में हरकत कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार अथवा देरी करने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल लेकर जाएं। समय पर अस्पताल पहुंचना और चिकित्सकीय उपचार शुरू होना ब्रेन स्ट्रोक के मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
