मुंबई: महाराष्ट्र में चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर सियासी टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और MNS प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में मुंबई में ‘गर्जना मार्च’ निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध दर्ज कराया गया।
मार्च में राज ठाकरे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए SIR को रद्द करने की मांग की। उन्होंने चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी दोहराई। राज ठाकरे ने 2024 के लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या तथा मतदान के आंकड़ों में हुए बदलाव को लेकर भी सवाल खड़े किए।
*राज ठाकरे ने वोटों के आंकड़ों पर उठाए सवाल*
राज ठाकरे ने दावा किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच करीब छह महीने का अंतर था, लेकिन इस अवधि में मतदाताओं और मतदान की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उन्होंने विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव की तुलना में करीब एक करोड़ ज्यादा वोट पड़ने पर भी सवाल उठाया।
राज ठाकरे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जाने वाले अपने पुराने आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और इसे लेकर अलग-अलग विपक्षी नेताओं से बातचीत भी कर चुके हैं।
*उद्धव ठाकरे का CEC ज्ञानेश कुमार पर हमला*
मार्च को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि “ज्ञानेश कुमार बीजेपी के हथियार हैं।” उद्धव ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी चयन समिति में पहले प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। उनके मुताबिक बाद में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्र सरकार के मंत्री को शामिल किया गया। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाए।
*मतदाता सूची को लेकर भी लगाए आरोप*
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया और पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु का भी उल्लेख किया।
हालांकि, यह आंकड़ा उद्धव ठाकरे के दावे के तौर पर सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं है।
*SIR को लेकर क्यों है विवाद?*
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटने की आशंका है और इससे मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर मुंबई में निकाले गए ‘गर्जना मार्च’ में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शन के दौरान ठाकरे बंधुओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
