इंदौर:अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने से लेकर थाने पहुंचने वाले फरियादियों की सुनवाई तक पुलिस की कार्यप्रणाली में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है. पुलिस कमिश्नर ने शनिवार को अधिकारियों की बैठक में स्पष्ट किया कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के साथ उसे पहले ही रोकने के प्रयास जरूरी हैं. शिकायतों पर बेवजह देरी और फरियादियों से दुर्व्यवहार के मामलों में संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी.
बैठक में बीट और माइक्रो बीट पुलिसिंग की समीक्षा करते हुए कमिश्नर ने अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने को कहा. बीट में तैनात पुलिसकर्मियों को नियमित भ्रमण कर संवेदनशील स्थानों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी होगी. आदतन अपराधियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाकर उनके खिलाफ समय रहते प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए. थानों में शिकायतों की सुनवाई को लेकर भी सख्त रुख अपनाया. कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि फरियाद लेकर आने वाले व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए. किसी शिकायत पर अपराध दर्ज करने में अकारण देरी या आवेदक के साथ दुर्व्यवहार सामने आने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी.
साइबर अपराधों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश
उन्होंने कहा कि पहले से प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके बदमाश दोबारा अपराध करते हैं तो इसकी भी समीक्षा की जाएगी. साइबर अपराधों को देखते हुए सभी थानों की साइबर डेस्क को सक्रिय रखने और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही कॉलोनियों और टाउनशिप में रहवासी समितियों के साथ बैठकें कर सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड और अन्य सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने पर जोर दिया. कानून-व्यवस्था से जुड़े आयोजनों और संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी पहले से जुटाने के लिए भी कहा गया.
बीट प्रभारियों और थाना स्टॉफ के कामकाज की होगी नियमित समीक्षा
कमिश्नर ने निर्देश दिए कि बीट प्रभारियों और थाना स्टाफ के कामकाज की नियमित समीक्षा एसीपी और एडिशनल डीसीपी करेंगे. पुलिस संसाधनों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता जांचने के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग के लिए प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए. बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर.के. सिंह, मयंक अवस्थी सहित सभी पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी मौजूद रहे. पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों को रिएक्टिव के बजाय प्रिवेंटिव पुलिसिंग को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। यानी अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय उसकी आशंका पहचानकर रोकथाम के प्रयास किए जाएं
