जबलपुर: रिटर्न चेक पर बैंक की सील और अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होने की स्थिति में आरोपी को चेक बाउंस के मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी डा. गौरव गर्ग की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में यह महत्वपूर्ण अभिमत व्यक्त करते हुए परिवाद निरस्त कर दिया। मामले में ठक्कर ग्राम निवासी मिजाल हुसैन ने गोहलपुर निवासी मो. अख्तर अंसारी के विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत किया था।
आरोप था कि अख्तर अंसारी ने दो लाख रुपये का चेक दिया था, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर बाउंस हो गया। आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि प्रस्तुत रिटर्न चेक पर बैंक की सील नहीं लगी है और न ही संबंधित बैंक अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। ऐसी स्थिति में चेक के बैंक द्वारा विधिवत लौटाए जाने के संबंध में आवश्यक प्रमाणिकता स्थापित नहीं होती। दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार के बाद न्यायालय ने रिटर्न चेक पर बैंक की सील व अधिकारी के हस्ताक्षर के अभाव को महत्वपूर्ण मानते हुए परिवाद निरस्त कर दिया।
