
जबलपुर। मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना… इस पंक्ति को गरीब नवाज कमेटी ने एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है। कैंसर पीडि़ता पिता की मौत के बाद बेबस बेटे की गुहार चर्च में नहीं सुनी गई लेकिन गरीब नवाज कमेटी के सदस्यों ने धर्म की दीवारें तोडक़र, ईसाई बुजुर्ग का पूरे सम्मान के साथ उनके धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया।
गरीब नवाज कमेटी के इनायत अली ने बताया कि कांचघर निवासी सिमोन वाइटर (57) पिछले 8 महीनों से कैंसर की बीमारी से पीडि़त थे। कल रात अचानक तबीयत ज्यादा बिगडऩे पर उन्हें मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सिमोन वाइटर के निधन के बाद उनके पुत्र लक्की वाइटर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास पिता के अंतिम संस्कार करने तक के पैसे नहीं थे। बेबस बेटे ने मदद की उम्मीद में मेथोडिस्ट चर्च में भी गुहार लगाई, लेकिन वहां से उन्हें कोई सहायता नहीं मिल सकी।
चर्च से निराश होने के बाद लक्की वाइटर ने गरीब नवाज कमेटी को अपनी बेबसी की सूचना दी। सूचना मिलते ही कमेटी ने तुरंत जिम्मेदारी संभाली और मानवता का परिचय दिया। कमेटी के सदस्यों ने अपनी देखरेख में ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार सभी जरूरी व्यवस्थाएं कीं। इसके बाद तिलवारा में ईसाई समाज के कब्रिस्तान में मृतक के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक दफनाया गया। यह अंतिम संस्कार मृतक के पुत्र लक्की के हाथों ही संपन्न कराया गया। इस मानवीय कार्य को सफल बनाने में गरीब नवाज कमेटी के सदस्यों आदिल पठान, रियाज अली, दीपक निगम, बाबू और विकास जैन उपस्थित रहे।
