भोपाल: मध्यप्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत राशन दुकानों की हड़ताल से हुई है। कमीशन बढ़ाने समेत मांगों को लेकर राशन विक्रेताओं ने 1 से 7 अक्टूबर तक प्रदेश की करीब 26 हजार उचित मूल्य दुकानें बंद रखने का फैसला किया है। इनमें भोपाल की करीब 400 दुकानें भी शामिल हैं. दुकानें बंद रहने से राशन वितरण प्रभावित होगा. राजधानी में करीब 3.42 लाख परिवारों के 14 लाख हितग्राही इन दुकानों पर निर्भर हैं. ऐसे में महीने की शुरुआत में राशन लेने वाले परिवारों को दुकानें खुलने का इंतजार करना पड़ेगा.
-90 पैसे में एक किलो अनाज बांट रहे दुकानदार
राशन विक्रेताओं को अभी 90 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है. यानी 100 किलो अनाज बांटने पर सिर्फ 90 रुपए. सीधे शब्दों में कहें तो एक किलो अनाज बांटने पर 90 पैसे कमीशन मिलता है. विक्रेताओं का कहना है कि इस रकम में दुकान का खर्च चलाना मुश्किल है. संघ कमीशन बढ़ाकर 250 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहा है.
-100 क्विंटल पर 16 हजार रुपए का अंतर
कमीशन का गणित समझें तो 100 क्विंटल यानी 10 हजार किलो अनाज बांटने पर मौजूदा दर से विक्रेता को 9 हजार रुपए मिलेंगे. 250 रुपए प्रति क्विंटल की मांग पूरी होने पर यही रकम 25 हजार रुपए होगी. यानी 100 क्विंटल अनाज पर 16 हजार रुपए का अंतर पड़ेगा.
-कमीशन भी समय पर नहीं मिलता
विक्रेताओं की परेशानी सिर्फ कम कमीशन तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि कमीशन की राशि भी कई बार तीन से चार महीने बाद मिलती है. इससे दुकान का किराया, बिजली और कर्मचारियों का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है. विक्रेता चाहते हैं कि कमीशन की राशि तय समय पर खाते में पहुंचाई जाए.
-कलेक्टरों और मंत्री से मुलाकात के बाद हड़ताल
हड़ताल से पहले संघ ने प्रदेश के कलेक्टरों से मुलाकात कर मांगपत्र सौंपे. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं. मंत्री की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों पर तत्काल फैसला नहीं होने पर संघ ने हड़ताल का ऐलान कर दिया.
7 दिन राशन वितरण पर ब्रेक
1 से 7 अक्टूबर तक दुकानें बंद रहने के कारण इस अवधि में उचित मूल्य दुकानों से राशन वितरण प्रभावित रहेगा. महीने की शुरुआत में राशन लेने वाले हितग्राहियों को दुकानें खुलने का इंतजार करना होगा. यदि हड़ताल आगे बढ़ती है तो इसका असर राशन वितरण व्यवस्था पर और बढ़ सकता है.
–सिर्फ कमीशन नहीं, ये भी मांगें
राशन विक्रेता 250 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन के साथ 40 हजार रुपए मासिक मानदेय की भी मांग कर रहे हैं. इसके अलावा तौल और परिवहन में होने वाली घटत की भरपाई तथा कमीशन का समय पर भुगतान उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है.
