नयी दिल्ली, 02 अक्टूबर (वार्ता) देश में पेट्रोल और डीजल की खपत में गत सितंबर महीने में वृद्धि देखी गई जबकि पीएनजी को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के कारण रसोई गैस (एलपीजी) की मांग में गिरावट जारी रही।
पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में पेट्रोल की घरेलू बिक्री सालाना आधार पर 7.21 प्रतिशत बढ़कर 36.44 लाख टन पर पहुंच गई। देश में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले डीजल की मांग 4.86 प्रतिशत बढ़कर 71.16 लाख टन रही।
इसके उलट, एलपीजी की खपत में सालाना आधार पर 9.15 फीसदी की गिरावट देखी गई। यह 26.36 लाख टन रही। पिछले साल सितंबर में यह आंकड़ा 29.02 लाख टन था।
रसोई गैस की मांग में यह गिरावट पश्चिम एशिया संकट के बाद सरकार द्वारा एलपीजी की जगह पीएनजी को बढ़ावा देने के प्रयासों का नतीजा है। इसमें कुछ योगदान वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का भी है जिसके बाद बड़े पैमाने पर ऐसे उपभोक्ताओं ने इंडक्शन जैसे वैकल्पिक साधनों को अपनाया है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से देश में आयातित एलपीजी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। इसे देखते हुए सरकार ने पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए। सिटी गैस वितरण कंपनियों को इसके लिए प्रोत्साहन दिए गए हैं।
इससे देश में न सिर्फ एलपीजी की खपत नहीं बढ़ी है बल्कि इसमें कमी भी आई है।
विमान ईंधन की मांग भी सितंबर में मामूली कम रही। इसका एक प्रमुख कारण विमान सेवा कंपनियों द्वारा उड़ानों की संख्या में कटौती रहा। विमान ईंधन की खपत पिछले महीने 7.20 लाख टन रही। यह एक साल पहले के मुकाबले 0.06 प्रतिशत कम है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में अप्रैल से सितंबर तक पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर सात प्रतिशत बढ़कर 226.73 लाख टन पर पहुंच गई। इस अवधि में डीजल की मांग 4.85 प्रतिशत बढ़ी और 478.91 लाख टन हो गई।
एलपीजी की खपत में पहली छमाही में 14.93 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। यह 137.97 लाख टन रह गई। विमान ईंधन की खपत में 0.39 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 44.35 लाख टन तक पहुंच गई।
